डोडा। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार देर रात हुई गोलीबारी की घटना के बाद विवाद गहरा गया है। भद्रवाह के जाई-गांडोह रोड इलाके में हुई इस घटना में 30 वर्षीय आरिफ हुसैन की मौत हो गई, जबकि स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के तीन जवान घायल हो गए। मृतक के परिजनों और दोस्तों ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।

पुलिस के अनुसार, घटना उस समय हुई जब आरिफ हुसैन ने कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों से सर्विस राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद गोलीबारी हुई। घटना के बाद आरिफ हुसैन के शव का पोस्टमार्टम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) डोडा में कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान परिवार और स्थानीय लोगों ने पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराने और सच्चाई सामने लाने की मांग की।

मृतक के रिश्तेदार सलीम जफर ने बताया कि आरिफ हुसैन भद्रवाह के भाला क्षेत्र के रहने वाले थे और पहले मजदूरी करते थे। कुछ समय पहले उन्होंने ऑटो रिक्शा खरीदा था और उसी को चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवार को केवल इतना पता चला कि आरिफ की गोली लगने से मौत हो गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर उनके साथ क्या हुआ।

सलीम जफर ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आरिफ की पत्नी से बात की। पत्नी ने बताया कि सुबह चार बजे पुलिस उन्हें घर से उठाकर भद्रवाह थाने ले गई थी। उस समय उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि आरिफ अस्पताल में हैं। बाद में परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि परिवार केवल सच्चाई जानना चाहता है और चाहता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

परिजनों का कहना है कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि आरिफ पर गोली चलाने की नौबत क्यों आई। उनका कहना है कि जब तक पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच नहीं होगी, तब तक कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाएंगे।

मृतक के दोस्त इमरान ने भी घटना पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उनकी आरिफ से मुलाकात हुई थी। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और बचपन से साथ बड़े हुए थे। इमरान ने कहा कि आरिफ एक साधारण व्यक्ति थे, जो ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की कार्रवाई कानूनी थी तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इमरान ने कहा कि परिवार और स्थानीय लोग केवल यही चाहते हैं कि यह स्पष्ट किया जाए कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और किन परिस्थितियों में यह कार्रवाई हुई। यदि जांच निष्पक्ष होगी, तभी लोगों का भरोसा कायम रहेगा।