नई दिल्ली। भारतीय हर्डलर संतोष कुमार तमिलरासन का मानना ​​है कि निरंतरता और आत्मविश्वास ने उन्हें ग्लासगो में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह बनाने में मदद की है।

28 साल के संतोष 2026 के शानदार कैंपेन के बाद भारत के शीर्ष 400 मीटर हर्डलर में से एक बनकर उभरे हैं। उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर हर्डल रेस में कांस्य और मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण जीता था। पेरिस 2024 ओलंपिक्स में भारत की 4x400 मीटर रिले टीम के सदस्य, संतोष ने इस सीजन में अपना पर्सनल बेस्ट 49.06 सेकंड तक कम किया और तिरुवनंतपुरम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज जीतकर साल की शुरुआत की। तमिलनाडु के इस एथलीट का फोकस अब उस मोमेंटम को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में ले जाने पर है।

पिछले दो सालों के अपने सफर के बारे में संतोष ने कहा कि हाल की सफलता से मिले आत्मविश्वास के बावजूद हर टूर्नामेंट एक नई चुनौती पेश करता है।

उन्होंने कहा, "एक एथलीट के तौर पर पिछले दो साल मेरे लिए बहुत जरूरी रहे हैं। ओलंपिक में हिस्सा लेने और फिर एशियन चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने से मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला है। हर चैंपियनशिप एक नई शुरुआत होती है। कॉमनवेल्थ गेम्स, भारत का प्रतिनिधित्व करने का एक और मौका है। मेरा फोकस अपनी रेस में दौड़ने और अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन देने पर है। मैं परिणाम के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहता। अगर मैं अपनी रेस को तैयारी के मुताबिक कर पाया तो, अपने प्रदर्शन से खुश होऊंगा।"

संतोष ने अपनी तैयारियों में अहम रोल निभाने के लिए इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट को श्रेय देते हुए कहा कि हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में मिलने वाले पूरे सहयोग ने ट्रेनिंग के हर पहलू को बेहतर बनाने में मदद की है।

उन्होंने कहा, "कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले मेरी तैयारी बहुत अच्छी रही है। इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट में समय बिताने से मुझे हर एरिया में सुधार करने में मदद मिली है, चाहे वह तकनीकी काम हो, स्ट्रेंथ या कंडीशनिंग हो, रिकवरी हो या स्पोर्ट्स साइंस हो। इस स्तर पर, छोटे-छोटे सुधार ही सबसे बड़ा फर्क लाते हैं। इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट के कोच और सपोर्ट स्टाफ का लगातार मुझे सुधार करने के लिए प्रेरित करना मुझे बहुत आत्मविश्वास देता है। इससे मैं अपनी ट्रेनिंग पर पूरी तरह फोकस कर पाता हूं और कॉम्पिटिशन में अच्छी तरह तैयार महसूस करता हूं।"

हर्डलर ने कहा कि इस सीजन में उनके लगातार सुधार ने यह पक्का किया है कि अलग-अलग उपलब्धियों में उलझने के बजाय प्रक्रिया पर भरोसा करना जरूरी है।

संतोष ने कहा, "हर सीजन आपको कुछ नया सिखाता है। इस साल मैं अपनी टाइमिंग में सुधार कर पाया हूं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाया हूं। इससे मुझे कॉन्फिडेंस मिलता है। रेस खत्म होने के बाद मैं पर्सनल बेस्ट के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। लक्ष्य हमेशा सुधार करते रहना है क्योंकि दुनिया के बेस्ट एथलीट के साथ मुकाबला करने का यही एकमात्र तरीका है। मुझे यह प्रक्रिया पसंद है और मैं इसे और बेहतर बनाना चाहता हूं।"

उन्होंने कहा, "भारत का प्रतिनिधित्व करना किसी भी एथलीट के लिए हमेशा गर्व की बात होती है। हर बार जब मैं इंडियन कलर पहनकर ट्रैक पर उतरता हूं, तो मुझे पता होता है कि मैं खुद से कहीं बड़ी चीज के लिए मुकाबला कर रहा हूं। मैं अपने परिवार, कोच और उन सभी का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरे पूरे सफर में मेरा साथ दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स में, मेरा मकसद ट्रैक पर अपना सब कुछ देना और देश को गर्व महसूस कराना है।"