नई दिल्ली। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा का मानना है कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम इंडिया के बढ़ते मेडल से पूरी टीम में आत्मविश्वास की लहर दौड़ रही है। पीटी उषा के अनुसार, ग्लासगो में मिली हर सफलता उन एथलीट्स को प्रेरित कर रही है जिन्हें अभी मुकाबला करना है।
'आईओए' की तरफ से जारी एक रिलीज में पीटी उषा ने कहा, "मल्टी-स्पोर्ट गेम्स का यह सबसे खूबसूरत पहलू है। आप देखते हैं कि एक वेटलिफ्टर तैराक के प्रदर्शन का जश्न मना रहा है, एक बॉक्सर किसी एथलीट का हौसला बढ़ा रहा है, या लॉन बॉल्स का खिलाड़ी किसी दूसरे खेल के खिलाड़ी को बधाई दे रहा है। वे भले ही अलग-अलग खेलों में मुकाबला करते हों, लेकिन वे एक ही जर्सी पहनते हैं और एक ही देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे एक बहुत खास रिश्ता बनता है।"
बतौर एथलीट अपने अनुभव को याद करते हुए, दिग्गज स्प्रिंटर ने कहा, "मैं खुद एक एथलीट रही हूं। मैं जानती हूं कि टीम के साथियों का आपके साथ खड़ा होना कितना मायने रखता है। अब तक जीते गए मेडल्स का जश्न पूरी टीम ने मनाया है। गर्व की यह साझा भावना उन एथलीट्स को आत्मविश्वास देती है जिन्हें अभी मुकाबला करना है। यह सभी को याद दिलाता है कि हम यहां अलग-अलग व्यक्तियों के तौर पर नहीं, बल्कि टीम इंडिया के तौर पर हैं।"
ग्लासगो में भारत के प्रयासों ने कई खेलों में गति पकड़ी है। टीम ने पैरा पावरलिफ्टिंग में मेडल जीतकर शुरुआत की, और फिर वेटलिफ्टर्स ने शानदार नतीजे दिए। ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने एक बार फिर गोल्ड मेडल जीतकर भारत के प्रदर्शन की अगुवाई की, और ज्ञानेश्वरी देवी और बिंदियारानी देवी ने भी पोडियम पर अपनी जगह बनाकर कॉमनवेल्थ के टॉप वेटलिफ्टिंग देशों में भारत की स्थिति को मजबूत किया है।
यह सफलता वेटलिफ्टिंग प्लेटफॉर्म से आगे भी गई है; भारत के पैरा एथलीट्स ने शॉट पुट में गोल्ड और ब्रॉन्ज जीतकर अपना शानदार फॉर्म जारी रखा है, और सर्वेश कुशारे ने ग्लासगो में मुश्किल हालात में अपने दृढ़ प्रदर्शन के दम पर पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल जीता है। इन कामयाबियों से एथलेटिक्स टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है।
सभी भारतीय एथलीट्स में एकता की भावना है। एबल-बॉडी और पैरा-एथलीट, दोनों ही एक-दूसरे की कामयाबी का जश्न मनाने में बराबर का उत्साह दिखाते हैं। कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, डॉक्टर और दूसरे सपोर्ट स्टाफ एक वेन्यू से दूसरे वेन्यू तक जाकर तकनीकी रूप से मदद के साथ-साथ हौसला भी बढ़ाते हैं। इस माहौल ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि हर मेडल किसी एक एथलीट या किसी एक खेल का नहीं, बल्कि पूरी भारतीय टीम का है।




