इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित रावलकोट शहर में मंगलवार को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सदस्यों और कानून-व्यवस्था संभालने वाली सुरक्षा एजेंसियों के बीच झड़प हो गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इस हिंसा में कुल 12 लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
'द न्यूज इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, पुंछ जिले के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने बताया कि 12 लोगों की जान गई है और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि जेएएसी के कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया और उनके पास आधुनिक हथियार भी थे। उनके अनुसार, इन लोगों ने इलाके में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की।
घटना के बाद पूरे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि झड़प में चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई है और 20 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
यह झड़प ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही सरकार ने जेएएसी को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था, क्योंकि उसने 9 जून को बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। जेएएसी पहले भी आर्थिक मुद्दों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर प्रदर्शन कर चुका है, जिनमें कभी-कभी हिंसा भी हुई थी, खासकर मई 2024 और सितंबर 2025 में।
रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट अब पूरे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में फैलते विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया है। हाल ही में जेएएसी से जुड़े कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के बाद तनाव बढ़ गया है।
कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार ने जेएएसी को प्रतिबंधित करने और सख्त सुरक्षा कदम उठाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पांच जून की रात से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट बंद कर दी गई हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, दो जेएएसी सदस्यों शाहजैब हबीब और अमजद कश्मीरी की मौत की खबरों के बाद लोगों में गुस्सा और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन फैल गए हैं। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लानडारी जैसे इलाकों में प्रदर्शन और हड़ताल की खबरें हैं। प्लानडारी में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने रास्ते भी जाम कर दिए हैं।
इस आंदोलन को विदेशों में भी समर्थन मिला है। ब्रिटेन में कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन किए हैं, और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रावलकोट में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 9 जून के ‘लॉन्ग मार्च’ से पहले माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। आने वाले कुछ दिन इस पूरे क्षेत्र के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि बढ़ते तनाव के बीच स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

