ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में उत्तर प्रदेश की आधुनिक औद्योगिक ताकत के साथ प्रदेश की सदियों पुरानी हस्तकला और कारीगरों का हुनर भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों से पहुंचे उत्पादों के बीच आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट का स्टॉल भी खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हाथों से तैयार किए गए ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें तैयार करने में कारीगरों को कई सप्ताह तक लगातार मेहनत करनी पड़ती है।
आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट से जुड़े रेहान अहमद ने बताया कि उनके यहां हाथ से काम करने की यह कला पीढ़ियों से चली आ रही है। परिवार के कारीगर पारंपरिक तकनीक के जरिए विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करते हैं। एक खास पीस को तैयार करने में आमतौर पर दो कारीगर लगातार काम करते हैं। उत्पाद की डिजाइन और बारीकी के आधार पर इसे तैयार होने में करीब एक से डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है।
रेहान अहमद के मुताबिक, इस पारंपरिक हस्तकला में नक्शी, टपका और कोरा जैसे मटेरियल और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए खास उत्पाद में तांबे का इस्तेमाल किया गया है। तैयार किए गए तांबे के उत्पाद के ऊपर सोने का पानी चढ़ाया जाता है। इसके बाद उत्पाद को एक खास चमक और आकर्षक रूप मिलता है। दूर से देखने पर इसकी फिनिशिंग और डिजाइन लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। स्टॉल पर प्रदर्शित प्रमुख उत्पादों में ज्वेल कारपेट भी शामिल है। नाम के अनुरूप यह सामान्य कारपेट से अलग डिजाइन और बारीक कारीगरी वाला उत्पाद है।
रेहान ने बताया कि ज्वेल कारपेट का इस्तेमाल दो कारपेट को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है। इसकी बारीक डिजाइन तैयार करने में कारीगरों को काफी समय और धैर्य की जरूरत होती है। कारीगरों की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मीटर का ज्वेल कारपेट पीस तैयार करने में भी दो कारीगरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इसमें डिजाइन की बारीकियों के साथ-साथ फिनिशिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। हाथ से किए जाने वाले काम के कारण हर पीस में कारीगर की मेहनत और उसकी अलग पहचान नजर आती है।
रेहान अहमद का कहना है कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे बड़े मंच पर आगरा की पारंपरिक हस्तकला को प्रदर्शित करने से स्थानीय कारीगरों को नए खरीदारों और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है। इससे न केवल पुराने हुनर को पहचान मिलती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी पारंपरिक कला से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
ट्रेड शो में इस बार हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और टेक्सटाइल को भी प्रमुख फोकस सेक्टर में शामिल किया गया है। ऐसे में आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट का स्टॉल यह दिखा रहा है कि उत्तर प्रदेश की पहचान केवल आधुनिक उद्योग और बड़े निवेश तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और जिलों में पीढ़ियों से चले आ रहे कारीगरों का हुनर भी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रेड शो में इन उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों के सामने पेश किए जाने से पारंपरिक हस्तकला को नए बाजार मिलने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।












