जबलपुर,अनुराग शुक्ला। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के बड़ेरिया मेट्रो प्राइम अस्पताल से मानवता और परोपकार की एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। 40 वर्षीय ब्रेन-डेड मरीज नरेंद्र रजक के परिजनों ने अत्यंत दुख की घड़ी में साहसिक और अनुकरणीय निर्णय लेते हुए उनका अंगदान (Organ Donation) करने का फैसला किया। नरेंद्र रजक भले ही इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनके परिजनों की इस महान पहल से तीन गंभीर मरीजों को जीवन जीने की नई आस मिली है।
तीन शहरों/अस्पतालों में हुआ सफल प्रत्यारोपण
नरेंद्र रजक की किडनी और लीवर को जरूरतमंद मरीजों के लिए दान किया गया, जिनका डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा सफल ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) किया गया: एक किडनी का सफल ट्रांसप्लांट बड़ेरिया मेट्रो प्राइम अस्पताल, जबलपुर में ही एक गंभीर मरीज को किया गया। लीवर को विशेष ग्रीन कॉरिडोर और वायु मार्ग से अहमदाबाद भेजा गया, जहां जरूरतमंद मरीज में इसका सफल प्रत्यारोपण हुआ। दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में किया गया।सभी प्रत्यारोपणों के बाद मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर और बेहतर बताई जा रही है।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावभीनी विदाई
अंगदान के इस महादान और परिजनों के अनुकरणीय योगदान को नमन करते हुए अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की मदद से विशेष सम्मान दिया गया: स्वस्थ हुए मरीज को अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने पर और अंगदाता के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honour) देकर भावभीनी विदाई दी गई। चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने नरेंद्र रजक के परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए संवेदनशीलता और परोपकार की एक अमर मिसाल बताया।
डॉक्टरों ने की 'अंगदान महादान' की अपील
इस अवसर पर चिकित्सकों ने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आम जनता से अधिक से अधिक संख्या में अंगदान के लिए संकल्प लेने की अपील की। "अंगदान एक ऐसा महादान है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति इस दुनिया से विदा होने के बाद भी अन्य जरूरतमंदों को नया जीवन दे सकता है।"














