महाराजपुर, शिवम चौरसिया। तहसील मुख्यालय महाराजपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों अव्यवस्थाओं का पर्याय बन गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महाराजपुर के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़ी मलहरा और कुर्राहा की जिम्मेदारी भी केवल एक डॉक्टर के भरोसे चल रही है। ऐसे में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित महाराजपुर क्षेत्र के इन तीनों सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। प्रतिदिन सुबह बड़ी संख्या में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मरीज बिना इलाज कराए वापस लौट जाते हैं, जबकि कुछ निजी क्लीनिकों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होते हैं।
इस संबंध में मेडिकल ऑफिसर डॉ. आलोक चौरसिया का कहना है कि महाराजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो अन्य डॉक्टर पदस्थ हैं। इनमें से एक डॉक्टर को नौगांव में अटैच किया गया है, जबकि दूसरे डॉक्टर बिना सूचना के लंबे समय से अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे में पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रही है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि यहां केवल डॉक्टरों की ही नहीं, बल्कि जरूरी संसाधनों की भी भारी कमी है। मरीजों का कहना है कि यदि किसी को ग्लूकोज की बोतल चढ़ानी हो तो पाइप, सिरिंज और टेप तक बाहर से खरीदकर लानी पड़ती है। वहीं, चोट लगने पर टांके लगाने के लिए धागा और घाव पर बांधने के लिए पट्टी तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहती। मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल में न दवाई है, न पर्याप्त स्टाफ और न ही आवश्यक सामग्री, तो ऐसी व्यवस्था आम लोगों के लिए किसी परेशानी से कम नहीं है।
क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि महाराजपुर सहित गढ़ी मलहरा और कुर्राहा स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टरों की पदस्थापना की जाए तथा अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।




