पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (आर) की सांसद शांभवी चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से भवानीपुर सीट से उपचुनाव की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। शांभवी चौधरी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी के लिए यह जरूरी है कि वो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनादेश को स्वीकार करें। इससे यह साफ जाहिर होता है कि ममता बनर्जी अपनी हार से तिलमिलाई हुई हैं। इस तरह के जनादेश को चुनौती देने से कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के आदेश को आपको स्वीकार करना ही होगा। जनता के फैसले को अपनाना ही एक सच्चे नेता की पहचान होती है।

इसके अलावा, उन्होंने पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, यह बैठक सार्थक साबित होगी। दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है, जिसमें ट्रेड का विषय प्रमुख है। इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां कहीं भी जाते हैं, वो भारत के लिए कुछ ना कुछ अच्छा लेकर ही आते हैं। उनके नेतृत्व में भारत में तेज गति से विकास हो रहा है। आज की तारीख में हम दुनियाभर में तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं की फेहरिस्त में शुमार हैं। आज हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह कहना गलत नहीं होगा कि आगामी दिनों में वैश्विक मोर्चे पर स्थिति हमारे लिए सकारात्मक होने जा रही है।

साथ ही, उन्होंने सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब बिहार में सभी अपराधियों को नेपाल भागना होगा, उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इस पर शांभवी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था का पालन हो।

उनके मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दोनों के नेतृत्व में अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत काम किया जा रहा है। अपराधियों को किसी भी तरीके से बचाया नहीं जा सकता है। ऐसी स्थिति में सीएम सम्राट चौधरी ने अपराधियों को लेकर जो बयान दिया है, उसका हम स्वागत करते हैं।

इसके अलावा, उन्होंने विपक्षी दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल राजनीति का एक निम्न स्तर स्थापित करना चाहते हैं। जितने भी विपक्ष के नेता हैं, वे नकारात्मक सोच के साथ ही अंगुलियां उठाते हैं। जो सांसद या विधायक होते हैं, वह अपनी मर्जी से ही किसी पार्टी में शामिल होते हैं। अगर कोई नेता किसी पार्टी में शामिल होना चाहता है या किसी विचारधारा के साथ जुड़ना चाहता है, तो वे ऐसे संविधान के प्रावधानों के तहत ही कर सकते हैं।