सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले में मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने जिला अस्पताल परिसर और शहर के प्रमुख चौराहों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाकर प्राइवेट एंबुलेंसों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र और अधूरे कागजातों के साथ दौड़ रहीं एंबुलेंसों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें जब्त कर यातायात थाने भेज दिया गया।


लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अचानक हुई कार्रवाई

सतना परिवहन विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर में बड़े पैमाने पर ऐसी प्राइवेट एंबुलेंस संचालित हो रही हैं, जिनके कागजात अधूरे हैं और जो अनिवार्य सुरक्षा व तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।


इन्हीं शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर यह चेकिंग अभियान चलाया गया। जांच के दौरान अधिकारियों को कई वाहनों में निम्नलिखित गंभीर कमियां मिलीं:


फिटनेस प्रमाणपत्र का न होना: कई एंबुलेंस बिना वैध फिटनेस के मरीजों को ढो रही थीं।

दस्तावेजों में कमियां: बीमा (Insurance), परमिट और वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजात अधूरे पाए गए।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी: मरीजों के परिवहन के लिए तय तकनीकी और आपातकालीन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।


अधिकारियों की मौजूदगी से संचालकों में हड़कंप

इस जांच अभियान के दौरान यातायात डीएसपी, यातायात प्रभारी और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहे।


अस्पताल परिसर और चौराहों पर अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों और चालकों में हड़कंप मच गया। स्थिति यह रही कि पुलिस और परिवहन विभाग की टीम को देखते ही कई चालक अपने वाहन लेकर रास्ते बदलते नजर आए।


सख्त चेतावनी: जब्ती और भारी जुर्माने की होगी कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ संदेश दिया है कि मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले किसी भी वाहन चालक या मालिक को बख्शा नहीं जाएगा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि:


बिना वैध कागजात, बीमा और फिटनेस के एंबुलेंस का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

भविष्य में यदि कोई भी अनधिकृत या नियम विरुद्ध एंबुलेंस सड़क पर पाई गई, तो उस पर वाहन जब्ती (Seizure) और भारी जुर्माने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।