नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की व्हाइट-बॉल टीम के पूर्व कप्तान आरोन फिंच ने स्टीव स्मिथ को अपने करियर में साथ खेले गए खिलाड़ियों में सबसे बेहतरीन बताया है। उन्होंने कहा कि एक लेग-स्पिन ऑलराउंडर से दुनिया के सबसे शानदार बल्लेबाजों में से एक बनने का उनका सफर, प्राकृतिक प्रतिभा, कड़ी मेहनत और अपने तरीकों पर अटूट विश्वास का एक अनोखा मिश्रण है।स्मिथ ने अपने करियर की शुरुआत एक लेग-स्पिनर के तौर पर की थी, जो आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते थे। उस समय उन्हें महान शेन वॉर्न के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। हालांकि, बाद में वे सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के बाद ऑस्ट्रेलिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज साबित हुए। उन्होंने टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया और क्रिकेट के सभी प्रारूपों में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी भी की।

फिंच ने 'क्रिकइन्फो के शो 'क्रिकेटर्स ऑन क्रिकेटर्स' पर कहा, "शुरुआत में स्टीव स्मिथ को शेन वॉर्न के विकल्प के तौर पर देखा जाता था। वह आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते थे, कुछ ओवर लेग-स्पिन गेंदबाजी करते थे और कभी-कभार फिनिशर के रूप में कुछ रन बना देते थे। फिर अचानक सब कुछ बदल गया। वह एक ऐसे शानदार बल्लेबाज बन गए, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।"

"वह हमेशा से ही अपने हाथों का बहुत इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ी रहे हैं, जो क्रीज पर काफी मूवमेंट करते थे और अपने पैरों को भी खूब चलाते थे। बाद में उन्होंने अपने खेल को सरल बना लिया और सब कुछ सही बैठ गया। शुरुआत में उनके बारे में यही चर्चा होती थी कि वे एक ऐसे बॉलिंग ऑलराउंडर हैं, जो ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में अगला बड़ा नाम बन सकते हैं। मगर फिर टेस्ट क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी में कुछ ऐसा बदलाव आया, जिसे उन्होंने बखूबी समझ लिया।"

फिंच ने आगे कहा, "लंबे समय तक छठे और पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने के बाद चौथे नंबर पर आना और वहां खुद को ढाल लेना, वाकई असाधारण था। मेरे साथ खेले गए खिलाड़ियों में वह सबसे बेहतरीन हैं। उनका मानना ​​है कि 'मैं इस तरह से खेलूंगा; बाहरी दुनिया को यह कैसा दिखता है, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसी तरीके से मुझे सबसे ज्यादा सफलता मिलेगी'।"

"यह एक तरह की सुपरपावर है। वह जो कर दिखाते हैं, उसे बाकी खिलाड़ी नहीं कर पाते। मेरे या डेविड वॉर्नर जैसे खिलाड़ी ऐसा क्यों नहीं कर सके, जबकि स्मिथ ने कर दिखाया, इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह एक स्वाभाविक प्रतिभा है, लेकिन इसमें उनकी कड़ी मेहनत और दिया गया समय भी शामिल है। यह वाकई असाधारण है।"

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्मिथ का करियर 2018 में केपटाउन में हुए बॉल-टेम्परिंग कांड की वजह से प्रभावित हुआ था, जिसके कारण उन पर 12 महीने का प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा, उन्हें दो साल तक किसी भी तरह की कप्तानी या नेतृत्व की भूमिका निभाने से भी प्रतिबंधित किया गया था। बाद में, वu मौजूदा टेस्ट कप्तान पैट कमिंस के उप-कप्तान बने।

अपनी कप्तानी में साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया को पुरुष टी20 विश्व कप का खिताब जिताने वाले फिंच का मानना ​​है कि कप्तानी की जिम्मेदारी न होने से स्मिथ को मदद मिली। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआत में उनके लिए टीम की कप्तानी करना थोड़ा मुश्किल था, खासकर तब जब टीम में स्मिथ जैसा बेहतरीन दाएं हाथ का बल्लेबाज मौजूद हो, लेकिन उसके पास कप्तानी की जिम्मेदारी न हो।

फिंच ने कहा, "2018 की घटना के बाद जब स्टीव स्मिथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापस लौटे, तो एक खिलाड़ी के तौर पर वे काफी रिलैक्स्ड थे, क्योंकि जाहिर सी बात है कि उनके पास कप्तानी नहीं थी। कप्तान के तौर पर आपका बहुत सारा समय खेल के अलावा अन्य चीजों में चला जाता है। इसके अलावा, वह अपनी तैयारी के लिए जितना काम करना चाहते थे, उसे पूरा करने का मानसिक दबाव भी उन पर होता था। एक तरफ आपको खुद को तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी होती है, और दूसरी तरफ आपको बाकी खिलाड़ियों की भी चिंता करनी पड़ती है।"

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने कहा, "इसी कारण 2018 के बाद कप्तानी का दबाव न होना उनके लिए एक बड़ी राहत की बात रही होगी। वह शायद यही सोचते होंगे कि अब उन्हें सिर्फ अपने खेल पर ध्यान देना है।शुरुआत में जब वह टीम में थे, तो मेरे लिए कप्तानी करना काफी मुश्किल था। मैंने काफी समय तक उनकी कप्तानी में खेला था और मुझे लगता था कि रणनीतिक तौर पर वे एक बेहतरीन कप्तान हैं। इसी वजह से कई बार मैं खुद से पूछता था कि क्या यह सही फैसला है? स्मिथ इस पर क्या सोचेंगे? फिर एक दिन उन्होंने मुझसे कहा, 'आप मुझसे बार-बार क्यों पूछते हैं? आप खुद अपना फैसला लें।"

फिंच ने 2015 के वनडे वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों में स्मिथ की बल्लेबाजी को भी अपनी सबसे सुखद यादों में से एक बताया, जब ऑस्ट्रेलिया ने अपने घरेलू मैदान पर खिताब जीता था। “स्टीव स्मिथ के साथ खेलने की मेरी सबसे पसंदीदा यादों में से एक 2015 का आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप है, जब वह नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए एक खतरनाक बल्लेबाज के रूप में उभर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच हुए क्वार्टर फाइनल में सबको वहाब रियाज बनाम शेन वॉटसन की टक्कर याद है, लेकिन दूसरे छोर पर स्टीव स्मिथ बल्लेबाजी कर रहे थे।"

फिंच ने आगे कहा, "ऐसा लग रहा था मानो वह किसी स्टंप से बल्लेबाजी कर रहे हों। उन्होंने वहाब की गेंदबाजी को भी मीडियम पेस जैसा बना दिया था। इसके बाद भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 89 गेंदों पर शतक जड़ा उनकी बल्लेबाजी कमाल की थी और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में उन्होंने नाबाद 56 रनों की पारी खेली। इन तीनों मैचों में वह कहीं से भी घबराए हुए नहीं दिखे।"

“वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण सबसे ज्यादा दबाव वाले मैच होते हैं, लेकिन यह खिलाड़ी पूरी तरह शांत रहकर बल्लेबाजी कर रहा था। बल्लेबाजी को लेकर उनके दिमाग में कभी कोई नकारात्मक विचार नहीं आता। मैं इसे उनकी एक गुप्त शक्ति मानता हूं, क्योंकि इसका मतलब यह है कि वह अपनी पिछली पारियों का कोई बोझ अगली पारी में अपने साथ नहीं ले जाते।"