छतरपुर, संतोष शिवहरे। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने शनिवार को छतरपुर के महोबा रोड स्थित कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने किसानों पर दर्ज किए जा रहे फर्जी मुकदमों, किसान नेताओं की गिरफ्तारी और प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ढोंढन बांध परियोजना से प्रभावित किसानों की जायज मांगों को सुनने के बजाय आंदोलनरत किसानों पर फर्जी एफआईआर दर्ज कर उन्हें प्रताडि़त कर रही है। प्रदर्शन करने वाले किसानों और उनके नेताओं पर दर्ज मुकदमे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हैं, जिन्हें सरकार को तत्काल वापस लेना चाहिए। डॉ. यादव ने कहा कि इस परियोजना के कारण हजारों परिवारों का भविष्य आज अधर में है और समाजवादी पार्टी उनके अधिकारों की लड़ाई हर स्तर पर लड़ेगी।


प्रेस वार्ता में सपा प्रदेशाध्यक्ष ने किसानों के विस्थापन और मुआवजे को लेकर ठोस मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित 12 लाख 50 हजार रुपये की मुआवजा राशि वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है, इसलिए इसे बढ़ाकर तत्काल 25 लाख रुपये किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि 1 जनवरी 2026 तक आधार कार्ड के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवक-युवतियों को भी पृथक रूप से मुआवजे का पात्र मानकर राशि दिलाई जाए। विस्थापन की प्रक्रिया पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों के लोगों को गांव के बदले गांव की तर्ज पर व्यवस्थित रूप से पुनर्वासित किया जाए। नए विस्थापन स्थलों पर सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि प्रभावित किसानों को जमीन के बदले जमीन दी जाए, और यदि ऐसा संभव न हो, तो नियमानुसार चार गुना मुआवजा देते हुए वर्तमान में दिए जा रहे 5 लाख रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे को बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति एकड़ किया जाना चाहिए।


किसानों के मुद्दों के अलावा डॉ. मनोज यादव ने छतरपुर जिले सहित पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने राजनगर क्षेत्र के विक्रमपुर थाना अंतर्गत दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग, छतरपुर बस स्टैंड क्षेत्र में आदिवासी बेटी के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म, लवकुशनगर में अवैध सट्टा कारोबार के लेनदेन में कृष्णकांत गुप्ता की हत्या और एमसीएक्स सट्टा कारोबार के कारण व्यापारी राजेश अग्रवाल की आत्महत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए इन्हें प्रशासनिक विफलता का बड़ा प्रमाण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को भी निशाना बनाया जा रहा है। विगत दिनों बिजावर के पत्रकार राकेश सिंह पर हुआ हमला और उल्टा उन पर ही मुकदमा दर्ज होना प्रशासन और माफियाओं की मिलीभगत को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि जो छतरपुर कभी शांति का टापू हुआ करता था, वह आज अपराध के कारण सुर्खियों में है। सरकार अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और युवाओं को नशे व अवैध कारोबार से बचाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। अंत में उन्होंने मांग की कि किसानों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं, जेल में बंद किसान नेताओं को रिहा किया जाए, बांध प्रभावितों के हक में सकारात्मक निर्णय हो और बढ़ते अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई कर जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जाए।