रोम। स्पेन के स्‍यूटा में चल रहे प्रवासी संकट पर को लेकर मंगलवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के गृह मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दोहराया कि अवैध प्रवासन से निपटने के लिए यूरोपीय देशों के बीच एकजुटता और साझा प्रयास जरूरी हैं।इतालवी समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस के अनुसार, इस बैठक की मांग 22 यूरोपीय देशों की ओर से हस्ताक्षरित एक पत्र के जरिए की गई थी। इस पहल का नेतृत्व इटली और डेनमार्क ने किया, लेकिन स्पेन की सीमा से लगे दो देशों, फ्रांस और पुर्तगाल ने इस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को 22 देशों और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज का पत्र मिला, जिसके बाद उन्होंने संकट की स्थिति का आकलन करने के लिए एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस को मंजूरी दी। उन्होंने दोहराया कि अवैध प्रवासन से निपटने के लिए यूरोपीय देशों के बीच एकजुटता और साझा प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने स्‍यूटा की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि हाल के दिनों में वहां पहुंचे किसी भी प्रवासी ने स्पेन की मुख्य भूमि या किसी अन्य ईयू देश तक पहुंचने में सफलता नहीं पाई है। अधिकांश लोगों को पहले ही मोरक्को वापस भेज दिया गया है। वॉन डेर लेयेन ने सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने, सभी प्रवेश बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय आयोग ने स्पेन को तुरंत सहायता देने की पेशकश की है।

प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईयू को भेजे अपने पत्र में स्‍यूटा प्रवासी संकट को लेकर कुछ देशों के रुख की आलोचना की और गृह मंत्रियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की। यह कदम इटली की ओर से स्पेन के साथ शेंगेन व्यवस्था को निलंबित करने के बाद उठाया गया। सांचेज ने आयरिश अध्यक्षता से विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया ताकि यह दोहराया जा सके कि बाहरी सीमाओं की सुरक्षा सभी सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारी है।

सांचेज ने कहा कि स्पेन ने सीमा पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया है, प्रवासियों को सहायता दी है, लगभग सभी अवैध रूप से पहुंचे लोगों को वापस भेज दिया है और उन्हें दूसरे देशों में जाने से भी रोका है, जबकि यूरोप से बहुत कम मदद मिली। उन्होंने स्पेन की प्रवासन नीति का बचाव करते हुए कहा कि इसकी वजह से अवैध प्रवेश में कमी आई है और स्पेन अब ईयू की बाहरी सीमाओं में 'दूसरी सबसे सुरक्षित सीमा' बन गया है।

सांचेज ने स्पेन को अस्थायी रूप से शेंगेन क्षेत्र से बाहर करने के प्रस्ताव को 'स्वार्थी' और 'गैर-वैध' बताया। उनका कहना था कि यह प्रस्ताव पूर्वाग्रहों या राजनीतिक हितों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि सीउटा खुद शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और स्पेन की सीमा ईयू की सबसे सुरक्षित और सबसे कम कमजोर सीमाओं में से एक है।