छतरपुर, रोहित पाठक। विश्वभर में सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया। नव दिवसीय इस महोत्सव के मध्य धर्मप्रेमियों को श्रीमद् भागवत महापुराण श्रवण करने का पावन अवसर मिल रहा है।बागेश्वर महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है। देश-विदेश से हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।

कथा के पहले दिन श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का बखान करते हुए बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन श्रीमद्भागवत महापुराण है। उन्होंने कहा कि जब जीव भगवान भागवत की शरण में चला जाता है तब वह संसार में भटकता नहीं बल्कि उसे जीवन का वास्तविक मार्ग प्राप्त हो जाता है।

महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को जीवन का सार बताते हुए कहा कि मन में भरकर नहीं, मन भरकर जीना सीखो। उन्होंने प्रेम की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य का प्रेम इतना निर्मल और गहरा होना चाहिए कि उसे परमात्मा के अलावा कोई और दिखाई न दे। उन्होंने आगे कहा कि एक बार जीव ठाकुर जी से बंध गया फिर वह कभी छूटता नहीं, क्योंकि ठाकुर जी बांधना जानते हैं, छोड़ना नहीं। महाराज श्री के इन प्रेरणादायी वचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया।


तीन दिवसीय गुरु दीक्षा कार्यक्रम में पहले दिन 500 लोग हुए शरणागत

बागेश्वर धाम के सेवादार राजपाल सिंह ने बताया कि तीन दिनों तक गुरु दीक्षा का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। गुरुदेव की आज्ञा से 23, 24 और 25 जुलाई को होने वाले गुरु दीक्षा कार्यक्रम के पहले दिन 500 लोगों ने शरणागति ली। उन्होंने बताया कि गुरु दीक्षा लेने वाले साधकों का पहले विधिवत पूजन होता है। वह दीक्षा लेने के पहले तक व्रत धारण करते हैं। दीक्षा के बाद ही उन्हें भोजन प्रसाद मिल सकता है। पूर्व में पंजीकृत हुए लोगों को गुरुदेव दीक्षा दे रहे हैं। यह कार्यक्रम दो दिनों तक और चलेगा। जितने लोगों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं उन्हें गुरुदेव भगवान से मंत्र दीक्षा मिलेगी।