बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने मंगलवार को राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने दही की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने के बाद, अब मामूली कमी की घोषणा करके जनता के गुस्से को शांत करने की कोशिश की है। उन्होंने दूध और दही की कीमतों में की गई इस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की।कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) को दही की कीमतें कम करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने हाल ही में दूध की कीमतों में की गई बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि इससे राज्य भर के 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को फायदा होगा।
एक बयान में अशोक ने कांग्रेस सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसके तहत पहले दही की कीमत में 14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई और फिर जनता के कड़े विरोध के बाद इसमें थोड़ी कटौती की घोषणा कर दी गई।
उन्होंने कहा कि यह कैसी जनहितैषी सरकार है? पहले तो कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ा दी जाती हैं, और फिर जनता को धोखा देने के लिए उनमें मामूली कटौती कर दी जाती है। दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों के मासिक बजट पर पहले ही अतिरिक्त बोझ पड़ चुका है। ऐसे समय में, जब लोग जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, उन पर और अधिक आर्थिक बोझ डालना एक जिम्मेदार सरकार की निशानी नहीं है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार से मुखातिब होते हुए, अशोक ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए सरकार को दूध उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन देना चाहिए और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान, उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को प्रोत्साहन दिए गए थे।
उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार सच में किसानों की चिंता करती है, तो उसे जरूरी प्रोत्साहनों का खर्च खुद उठाना चाहिए। सरकार अपनी जिम्मेदारी से क्यों भाग रही है और किसानों की मदद करने के नाम पर आम लोगों पर बोझ क्यों डाल रही है?
अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार की उस टिप्पणी की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि बोतलबंद पानी की कीमत बढ़ने पर कोई सवाल नहीं उठाता। अशोक ने पूछा कि मुख्यमंत्री दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी को सही ठहराने के लिए ऐसा तर्क कैसे दे सकते हैं, जबकि ये चीजें लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतें हैं।
उन्होंने कहा कि दही की कीमतों में मामूली कटौती काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार दूध की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पर भी पुनर्विचार करे और दूध तथा दही, दोनों की कीमतें कम करे।
उन्होंने कहा कि सरकार को उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के बजाय अपने फंड से किसानों को उचित प्रोत्साहन देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का काम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें राहत देना है।














