नई दिल्ली/छतरपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित हो रहे आदिवासियों और किसानों के हक में केंद्र व राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रभावित ग्रामीणों के जल-सत्याग्रह आंदोलन का एक संवेदनशील वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि परियोजना के नाम पर आदिवासियों की जमीनें छीन ली गईं, लेकिन उन्हें न तो न्यायपूर्ण मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था की गई।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, मोदी सरकार सत्य और सत्याग्रह, दोनों से डरती है। आदिवासियों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भारी पुलिस बल के जरिए कुचला जा रहा है। आदिवासियों के अधिकारों की बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, सत्य यह है कि आदिवासी इस देश के पहले मालिक हैं। जल, जंगल और जमीन पर सबसे पहला अधिकार उन्हीं का है और उनका सत्याग्रह इसी अधिकार की रक्षा के लिए है। कांग्रेस प्रभावित आदिवासी भाई-बहनों और किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। जब तक सरकार प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दे देती, उन्हें न्याय दिलाने के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
छतरपुर के 24 गाँव हो रहे विस्थापित
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से छतरपुर के 24 गांवों का विस्थापन होना है। आठ गांव डूब क्षेत्र में हैं। 16 गांव पन्ना टाइगर रिजर्व में शामिल किए जाएंगे। डूब क्षेत्र वाले गांवों में ज्यादा विरोध है। ग्रामीण विकसित ग्राम में भूखंड और 5 लाख रुपए मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि प्रशासन 12.50 लाख रुपए दे रहा है। स्थानीय ग्रामीण इसके विरोध में पानी के अंदर चिता आंदोलन कर रहे थे। कूपी गांव के बराना नदी घाट से आंदोलनकारियों को 20 जुलाई की सुबह प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हटा दिया था। प्रशासन का कहना था कि लगातार बारिश और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए कार्रवाई की गई। प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद ग्रामीणों ने अब चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू कर दिया है।




