लखनऊ। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उनके खिलाफ लगे आरोपों का सत्यापन (वैरिफिकेशन) करने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आगामी 17 अगस्त को सुनवाई करेगा। इसके अतिरिक्त, राहुल गांधी ने 7 अगस्त को एक ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने इस पूरे मामले को लखनऊ बेंच से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।
मामले की पृष्ठभूमि और अदालती कार्यवाही
कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने 25 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाते हुए सीबीआई, ईडी, सीबीडीटी (CBDT) और गृह मंत्रालय समेत 10 केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने मई माह में सुनवाई करते हुए केंद्रीय एजेंसियों को आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 20 जुलाई को सीबीआई और ईडी द्वारा दाखिल जवाबों पर असंतोष व्यक्त करते हुए अदालत ने सीबीआई को जांच की प्रगति स्पष्ट करने वाला नया हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया था, जिस पर अगली सुनवाई 20 अगस्त को होनी है।
केंद्रीय जांच एजेंसी की पूछताछ और अन्य याचिकाएं
हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में सीबीआई ने याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर को समन भेजकर लगातार दो दिनों में कुल 13 घंटे तक गहन पूछताछ की है। इस दौरान विग्नेश शिशिर ने कथित लेन-देन, विदेश यात्राओं और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और विवरण जांच अधिकारी को सौंपने का दावा किया है। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने लखनऊ हाईकोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ एक अन्य याचिका भी दायर कर रखी है, जिसमें ब्रिटिश सरकार के वर्ष 2022 के एक कथित ईमेल का हवाला देते हुए उनकी भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की गई है।




