छतरपुर/बकस्वाहा, राजू दुबे। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बकस्वाहा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था उजागर हुई है। गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जब जिला अस्पताल छतरपुर के लिए रेफर किया जाता है, तो उन्हें आपातकालीन एंबुलेंस सेवा (108) समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। रविवार को एक ही दिन में ऐसे दो गंभीर मामले सामने आए, जहां घंटों इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची और बेबस तीमारदारों को कर्ज या भारी-भरकम किराया देकर निजी वाहनों से मरीजों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही से क्षेत्र के नागरिकों में गहरा आक्रोश है।

पहला मामला छतरपुर रोड पर घटित सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। इस सड़क हादसे में रामरति लोधी (उम्र 35 वर्ष) और तेजी लोधी (उम्र 40 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजनों द्वारा आनन-फानन में दोनों घायलों को बकस्वाहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल छतरपुर ले जाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन और 108 सेवा को तत्काल सूचना दी गई, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल महिलाएं दर्द से कराहती रहीं, जिसके बाद परिजनों ने मजबूर होकर एक निजी वाहन की व्यवस्था की और उन्हें जिला अस्पताल रवाना किया।

एंबुलेंस की अनुपलब्धता का दूसरा मामला मच्छद्री गांव से सामने आया। यहां की 18 वर्षीय युवती ज्योति अहिरवार को अचानक सीने में तेज दर्द उठने पर परिजनों ने बकस्वाहा अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक परीक्षण के पश्चात डॉक्टरों ने युवती की स्थिति नाजुक बताते हुए तत्काल जिला अस्पताल ले जाने के लिए रेफरल पर्ची बना दी। यहां भी परिजनों ने घंटों तक सरकारी एंबुलेंस का इंतजार किया, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। मरीज की बिगड़ती हालत को देखकर परिजन घबरा गए और उन्होंने आनन-फानन में निजी साधन जुटाकर मरीज को छतरपुर भिजवाया।


जिला मुख्यालय से दूरी बनी उपेक्षा का कारण, परिजनों ने उठाए सवाल

पीड़ित परिवारों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बकस्वाहा ब्लॉक जिला मुख्यालय से काफी दूरी पर स्थित है, जिसके कारण स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी इस क्षेत्र की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते हैं। आपात स्थिति में जब 'गोल्डन ऑवर' में मरीज को त्वरित इलाज की दरकार होती है, तब सरकारी एंबुलेंस का न मिलना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। परिजनों का आरोप है कि कॉल सेंटर पर सूचना देने के बावजूद घंटों तक गाड़ी उपलब्ध न होने का बहाना बनाया जाता है या फिर गाड़ियां अन्य क्षेत्रों में व्यस्त बताई जाती हैं।