अहमदाबाद/गांधीनगर, 28 अक्टूबर । आम आदमी पार्टी (आप) के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने बुधवार को मांग की कि राज्य सरकार सूखा प्रभावित किसानों को 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा दे और किसानों के कर्ज माफ करे। सरकार की ओर से घोषित राहत राशि खेती की लागत और ग्रामीण क्षेत्रों की बढ़ती परेशानियों के मुकाबले काफी कम है।

अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गढ़वी ने सरकार के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपए की सहायता देने की घोषणा की गई है। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर तक सीमित है, यानी एक किसान को अधिकतम 17,000 रुपए ही मिल सकेंगे।

गढ़वी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों, पशुपालकों, कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों की समस्याओं को दूर करने में विफल रही है। उन्होंने सभी प्रभावित वर्गों के लिए व्यापक राहत पैकेज की मांग की।

यह बयान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के दो दिन बाद आया है। इन जिलों में मानसून की बारिश कम और देरी से होने के कारण यह फैसला लिया गया।

राज्य सरकार की ओर से 1 नवंबर से लागू होने वाले राहत पैकेज में राज्य आपदा राहत कोष के नियमों के तहत फसल नुकसान सहायता, रियायती दर पर चारा, पशु शिविरों के लिए सहयोग और प्रभावित क्षेत्रों में 150 दिन का रोजगार शामिल है।

गढ़वी का कहना है कि यह मुआवजा किसानों की वास्तविक लागत के मुकाबले बहुत कम है। उनके अनुसार, खाद-बीज, ट्रैक्टर, निराई-गुड़ाई और बिजली पर किसानों का खर्च 20,000 से 21,000 रुपए प्रति बीघा तक पहुंच जाता है।

उन्होंने कहा कि बीज और खाद की बढ़ती कीमतों को देखते हुए घोषित सहायता फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को बहुत कम राहत देगी।

गढ़वी ने पिछले वर्ष बेमौसम बारिश के दौरान दी गई सहायता का हवाला देते हुए कहा कि उस समय राज्य सरकार ने 22,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की सहायता दी थी, जो अधिकतम दो हेक्टेयर तक सीमित थी।

उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर सहायता देने और महाराष्ट्र व राजस्थान जैसे राज्यों में कर्ज माफी तथा नकद सहायता योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में भी किसानों के लिए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया जाना चाहिए।

'आप' नेता ने आरोप लगाया कि मूंगफली की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और पहले के राहत पैकेजों के जरिए सरकार के पास पर्याप्त धन उपलब्ध है, लेकिन उसका उचित उपयोग किसानों की मदद के लिए नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि सूखा प्रभावित चारों जिलों के किसान अपने परिवार का दैनिक खर्च चलाने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

गढ़वी ने सिंचाई और पेयजल व्यवस्था, चारे की उपलब्धता और बटाईदार किसानों को सहायता देने के मुद्दों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले रबी और गर्मी के मौसम के लिए किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल नहीं मिल रहा, जबकि उद्योगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने सौनी सिंचाई योजना की भी आलोचना करते हुए कहा कि बांधों का पर्याप्त विकास नहीं होने से योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान 44 बांधों के कमांड क्षेत्रों में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया गया था और जल उपलब्धता के आधार पर आगामी रबी सीजन में 76 बांधों के लिए पानी की व्यवस्था की गई है।

सरकार का यह भी कहना है कि पेयजल को प्राथमिकता दी गई है और 30 जून 2027 तक के लिए जल भंडारण की योजना बनाई गई है। सरकार के अनुसार, अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा 2 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर वितरित किया जा चुका है। वर्तमान में 3 करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है और अतिरिक्त खरीद की प्रक्रिया भी जारी है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित पशु शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए दो महीने तक 80 रुपए प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी। इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार सहायता जारी रखेगी।