भोपाल। मध्य प्रदेश में घरेलू और व्यावसायिक ईंधन की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने पीएनजी (पाइप नेचुरल गैस) के विस्तार को लेकर बेहद सख्त और त्वरित नीति अपनाई है, जिसके तहत अब आवेदन करने के मात्र 5 दिन के भीतर पीएनजी कनेक्शन प्रदान किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां के उपभोक्ताओं को अगले 3 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से कनेक्शन लेना होगा, अन्यथा उनका वर्तमान एलपीजी सिलेंडर कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। यह मुहिम मुख्य रूप से रेजिडेंशियल कैंपस, स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज, कम्युनिटी किचन और आंगनवाड़ी केंद्रों को लक्षित कर शुरू की गई है।


प्रदेश के 21 जिलों में पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को सुगम बनाने और उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन समेत अन्य प्रमुख शहरों में कार्यरत 10 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले 3 महीने का लक्ष्य निर्धारित कर घर-घर कनेक्शन पहुँचाना सुनिश्चित करें। इसके लिए भारत सरकार के 'गतिशक्ति पोर्टल' पर पाइपलाइन का डेटा अपलोड करने के साथ-साथ जिला प्रशासन के सहयोग से विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे। सरकारी तंत्र की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी आरओयू (ROU) अनुमति अब आवेदन के मात्र 24 घंटे के भीतर प्रदान की जा रही है।


खाद्य विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कंपनियों के कंट्रोल रूम नंबर जारी किए गए हैं। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के लिए अवंतिका गैस लिमिटेड (9424098887), भोपाल, राजगढ़ और शिवपुरी के लिए थिंक गैस (1800-5727-107), और रीवा-मऊगंज के लिए आईओसीएल (9424836488) जैसे हेल्पलाइन नंबरों पर उपभोक्ता संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा धार, देवास, सागर, जबलपुर और सतना जैसे जिलों के लिए भी संबंधित कंपनियों ने अपने शिकायत एवं पूछताछ केंद्र सक्रिय कर दिए हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जनता से अपील की है कि वे पीएनजी जैसी सुरक्षित और किफायती सुविधा को अपनाएं और किसी भी प्रकार की पैनिक बाइंग या अफवाहों से बचें, क्योंकि प्रदेश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।


शासन ने एक ओर जहाँ पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए रियायतें दी हैं, वहीं दूसरी ओर ईंधन की कालाबाजारी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब तक प्रदेश में 2693 स्थानों पर छापामार कार्रवाई की गई है, जिसमें 3552 एलपीजी सिलेंडर जब्त कर 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही 666 पेट्रोल पंपों की जांच भी की गई है। सरकार का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि मध्य प्रदेश अब पारंपरिक सिलेंडरों की कतारों से मुक्त होकर पाइपलाइन गैस के आधुनिक और पारदर्शी युग में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।