नई दिल्ली, 30 अप्रैल । अप्रैल में ही सूर्य अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। हर दिन के साथ गर्मी बढ़ रही है, लेकिन मई के महीनों में नौ दिन ऐसे होते हैं, जो आने वाले मानसून को निर्धारित करते हैं। हम बात कर रहे हैं नौतपा की। इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी और 2 जून तक रहेगी। इन नौ दिनों में सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है, और यही कारण है कि वायुमंडल में अधिक गर्मी की वजह से धरती आग का गोला बन जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं नौतपा में सूर्यदेव और मानसून का गहरा रिश्ता है?
"तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय" यानी नौतपा के नौ दिनों में जितनी गर्मी पड़ती है, मानसून उतना ही अच्छा होता है, जो सीधे तौर पर किसानों की फसलों को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। ऐसे में नौ दिन जमकर गर्मी पड़ना बहुत जरूरी है। नौतपा के बाद अच्छे मानसून की कामना के लिए किसान और देश के कुछ राज्यों में भगवान सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते है।
नौतपा में सूर्य भगवान को खुश करने के लिए रोजाना सूर्योदय होने से पहले स्नान करें और तांबे के लोटे में जल लेकर अर्पण करें। इससे भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और नौतपा में अपने कुप्रभाव से लोगों को राहत देते हैं। इसके साथ ही नौतपा में पक्षियों को पानी पिलाना और गुड़, घी, गेहूं और लाल कपड़े का दान गरीबों को करना शुभ माना जाता है। आप चाहे तो मिट्टी के मटके का दान भी कर सकते हैं। माना जाता है कि पानी और गुड़ का दान ज्येष्ठ माह में करना 100 गुना पुण्य देता है।
नौतपा में 'आदित्य हृदय स्तोत्र' और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा का असर अच्छा मानसून लेकर आता है। नौ दिन भले ही अधिक गर्म हो सकते हैं लेकिन यह प्रकृति का नियम है। तपती गर्मी की वजह से ही समंदर से निकलने वाली वाष्प अच्छे बादल बनाने में मदद करती है, जिससे बारिश अच्छी होने की संभावना बढ़ जाती है।
सूर्य का पिता का कारक माना जाता है। जो लोग अपने पिता का सम्मान करते हैं, उनका सूर्य हमेशा मजबूत स्थिति में होता है। इसलिए सूर्य को मजबूत करने के लिए पिता की सेवा और आदर जरूर करें।

