नई दिल्ली, 30 अप्रैल । सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। इसके पांचो अंगों (तिथि, वार, योग, करण व नक्षत्र) के आधार पर ही दिन की शुरुआत व शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। 1 मई को बैशाख पूर्णिमा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है।

शुक्रवार को पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त दोनों एक साथ पड़ रहे हैं, जो शुभ कामों के लिए बेहद अच्छा माना जाता है।

बैशाख पूर्णिमा पर सूर्योदय 5 बजकर 41 मिनट पर होगा। वहीं, सूर्यास्त शाम 6 बजकर 56 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर और चंद्रास्त 2 मई की सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगा।

नक्षत्र स्वाती रहेगा, जो भोर में 4 बजकर 35 मिनट (2 मई) तक चलेगा। इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा। योग सिद्धि शाम 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, बैशाख पूर्णिमा के दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त एक साथ होने से कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि भद्रा और राहुकाल जैसे अशुभ समय में किसी भी महत्वपूर्ण काम को शुरू करने से बचना चाहिए। इस पावन दिन पर लोग स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देने जैसे कार्य करते हैं। बैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है।

शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय की बात करें तो भद्रा सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 10 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 59 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।