मिल्वौकी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कनाडा के अंतराष्ट्रीय व्यापार के मंत्री मनिंदर सिद्धू , यूके के बिजनेस, इनोवेशन, साइंस और ट्रेड सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जोनाथन रेनॉल्ड्स और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री सीनेटर डॉन फैरेल से मुलाकात की।गोयल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स'पर की गई पोस्ट में कहा गया कि मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ एक सार्थक बैठक हुई।
हमने भारत-कनाडा सीईपीए के लिए चल रही बातचीत की समीक्षा की। इस समझौते को हमारे प्रधानमंत्रियों ने इस साल मार्च में शुरू किया था, जिसका मकसद 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
मुंबई में हुई हमारी हालिया बैठक के आधार पर, हमने बातचीत में तेजी लाने और समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में काम करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया।
इसके अलावा, गोयल ने यूके और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्रियों से भी मुलाकात की।
यूके के बिजनेस, इनोवेशन, साइंस और ट्रेड सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जोनाथन रेनॉल्ड्स से मुलाकात के बाद गोयल ने कहा कि 15 जुलाई 2026 से लागू भारत-यूके सीईटीए के कार्यान्वयन की समीक्षा की और इसकी पूरी क्षमता का लाभ उठाने एवं द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के तरीकों पर चर्चा की।
बातचीत का मुख्य फोकस ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने और इस समझौते के ज़रिए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने की कोशिशों पर था।
गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री सीनेटर डॉन फैरेल से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने 'भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता पर बातचीत में तेजी लाने के प्रयासों पर चर्चा की।
गोयल के अनुसार, बैठक में फार्मास्यूटिकल्स, सर्विसेज, इन्वेस्टमेंट, एग्री-टेक और जरूरी मिनरल्स जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा, "भारत-ऑस्ट्रेलिया कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर बातचीत में तेजी लाने और फार्मास्यूटिकल्स, सर्विसेज, इन्वेस्टमेंट, एग्री-टेक और जरूरी मिनरल्स के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की गई।"
गोयल और फैरेल ने 'भारत-ऑस्ट्रेलिया इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट' (ईसीटीए) के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की।
गोयल ने कहा कि बातचीत में यह सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई कि भारतीय कंपनियां ऑस्ट्रेलियाई बाजार में मिलने वाली ड्यूटी-फ्री सुविधा का पूरा फायदा उठा सकें।













