छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मानसून की देरी और कनहर गांव डैम के सूख जाने से छिंदवाड़ा शहर में जल संकट गहरा गया है। शहर की लगभग आधी आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने वाला कनहर गांव डैम इस समय डेड स्टोरेज के भरोसे चल रहा है। पिछले एक सप्ताह से शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने भूजल को वैकल्पिक स्रोत के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। महापौर विक्रम अहके के निर्देश पर निगम के इंजीनियरों की टीम ने लंबे समय से बंद पड़े 10 बोरवेलों को दोबारा चालू कर दिया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।


सोमवार को महापौर विक्रम अहके और नगर निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय ने कनहर गांव डैम का निरीक्षण कर जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने डेड स्टोरेज में उपलब्ध पानी का अधिकतम उपयोग करने की रणनीति पर चर्चा की।


महापौर ने बताया कि डेड स्टोरेज का पानी कैनाल तक पहुंचाने के लिए 40-40 हॉर्स पावर की दो मोटरें स्थापित की जा रही हैं। इन मोटरों के संचालन के बाद मंगलवार से प्रभावित क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति शुरू की जाएगी। साथ ही शहर में नियमित जल सप्लाई बहाल करने के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी तेजी से की जा रही हैं।


नगर निगम का कहना है कि मानसून की अच्छी बारिश होने तक वैकल्पिक संसाधनों के माध्यम से शहरवासियों को राहत देने का हर संभव प्रयास किया जाएगा, ताकि पेयजल संकट का प्रभाव न्यूनतम रहे।