दतिया, आयुष शुक्ला। मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आज (30 जुलाई 2026) मतदान संपन्न हो गया है। इस उपचुनाव में पिछले चुनावों के मुकाबले मतदान का प्रतिशत कुछ कम दर्ज किया गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। क्या यह कम वोटिंग सत्ताधारी भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगी या कांग्रेस के लिए चिंता का सबब? यह 3 अगस्त को आने वाले परिणामों के बाद ही स्पष्ट होगा।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे से शुरू हुई मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। दोपहर 1 बजे तक लगभग 50% मतदान दर्ज किया गया था, जबकि अंतिम घंटों में गति धीमी रही। इस तरह कुल 69.36% मतदान हुआ जो कि पिछली बार के मुकाबले 11% कम है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों में आमतौर पर आम चुनावों की तुलना में मतदान प्रतिशत कम रहता है। उल्लेखनीय है कि दतिया में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में 77.2% और 2023 में भी उच्च मतदान दर्ज किया गया था। इस बार मतदान में आई कमी को स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की उदासीनता से जोड़कर देखा जा रहा है।


मुख्य मुकाबला: भाजपा बनाम कांग्रेस और 'तीसरा' फैक्टर

दतिया का यह उपचुनाव साख की लड़ाई बना हुआ है। चुनावी मैदान में मुख्य रूप से तीन ध्रुव नजर आ रहे हैं:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): पार्टी ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी है, क्योंकि उन्हें चुनाव संचालन की कमान सौंपी गई है।
  • कांग्रेस (INC): पार्टी ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। कांग्रेस यह सीट बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, क्योंकि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी।
  • आज़ाद समाज पार्टी (ASP): दामोदर सिंह यादव की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया है। सांसद चंद्रशेखर आजाद के दौरों ने इस सीट पर दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक में सेंधमारी की संभावना पैदा कर दी है।


क्या कम वोटिंग से बदलेंगे समीकरण?

कम मतदान प्रतिशत को लेकर दोनों प्रमुख दलों के अपने-अपने दावे हैं:

  • भाजपा का तर्क: भाजपा नेताओं का दावा है कि उनके समर्पित मतदाता घर से बाहर निकले और पार्टी की जीत सुनिश्चित है।
  • कांग्रेस का दावा: कांग्रेस का मानना है कि मतदान में कमी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का संकेत है और उनके पारंपरिक वोटर्स ने एकजुट होकर मतदान किया है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि जब मतदान प्रतिशत गिरता है, तो 'कैडर वोट' (पार्टी के पक्के समर्थक) निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवार भाजपा-कांग्रेस के जीत के अंतर को प्रभावित कर सकते हैं।


रिजल्ट की तारीख

दतिया विधानसभा उपचुनाव के भाग्य का फैसला 3 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन मतगणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि दतिया की जनता ने विकास के वादों पर मुहर लगाई है या बदलाव को चुना है। यह परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व के लिए भी एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।


सिरोल और जिगना में फर्जी वोटिंग का आरोप, नरोत्तम का पलटवार

उपचुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने सिरोल मतदान केंद्र पर पहुँचकर गड़बड़ी की आशंका जताई और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की शिकायत की। वहीं, जिगना बूथ पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर बाहरी लोगों को लाकर फर्जी मतदान कराने का आरोप लगाया।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "कांग्रेस की कार्यशैली जगजाहिर है। जब भी चुनाव में उनकी हार सुनिश्चित दिखाई देती है, वे बेबुनियाद आरोप लगाना शुरू कर देते हैं। ये आरोप उनकी हताशा और निराशा का ही परिचायक हैं।"


रामसागर में एजेंट को हिरासत में लेने पर थाने में हंगामा

मतदान के दौरान रामसागर गांव के मतदान केंद्र पर उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब पुलिस ने कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को हिरासत में ले लिया। वहां मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने जब पुलिस की इस कार्रवाई का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस घटना के विरोध में स्थानीय कांग्रेस नेता बड़ी संख्या में संबंधित थाने पहुँच गए। भारी दबाव और हंगामे के बाद पुलिस प्रशासन ने अंततः हिरासत में लिए गए पोलिंग एजेंट को रिहा कर दिया।


दतिया के 291 मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान के साथ ही, मतदान प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड टूटने की संभावना जताई जा रही है। मुख्य मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को अलर्ट पर रखा गया है। शाम 6 बजे मतदान प्रक्रिया आधिकारिक रूप से संपन्न हो जाएगी, जिसके बाद सभी ईवीएम मशीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम में सील किया जाएगा।


मतदान के प्रमुख अपडेट्स

  • तकनीकी खराबी का समाधान: मतदान के शुरुआती घंटों में कुछ केंद्रों पर ईवीएम (EVM) में तकनीकी समस्या आई थी। जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने पुष्टि की कि बूथ क्रमांक 186 (वीवीपैट), 108 (बैलेटिंग यूनिट) और 290 (कंट्रोल यूनिट) में खराब मशीनों को समय रहते बदलकर मतदान सुचारु रूप से जारी रखा गया।
  • लखनपुर में बहिष्कार: बसई के लखनपुर गांव में ग्रामीणों ने 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' का नारा देकर मतदान का बहिष्कार किया। एसडीएम अशोक अवस्थी के मौके पर पहुँचकर समझाइश देने के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।


मॉक पोल के दौरान 3 केंद्रों पर तकनीकी खराबी, समय रहते बदलीं मशीनें

मतदान प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले जिले के तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम (EVM) से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खामियाँ सामने आईं। जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मॉक पोल के दौरान ही इन गड़बड़ियों की पहचान कर ली गई थी:

  • केंद्र क्रमांक 186: वीवीपैट (VVPAT) में खराबी।
  • केंद्र क्रमांक 108: बैलेटिंग यूनिट (BU) में तकनीकी समस्या।
  • केंद्र क्रमांक 290: कंट्रोल यूनिट (CU) में खराबी।

सभी एजेंटों और वीडियोग्राफी कैमरों की मौजूदगी में इन मशीनों को तत्काल बदल दिया गया, जिसके चलते मतदान निर्धारित समय पर ही प्रारंभ हो सका।


प्रत्याशियों के दावे और आरोप

  • कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह: मतदान के बाद उन्होंने ऐतिहासिक जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार को तोड़ेगी। उन्होंने बसई क्षेत्र में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को बूथ में प्रवेश न दिए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया।
  • भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी: सुबह पीतांबरा पीठ में दर्शन कर उन्होंने दतिया के विकास, युवाओं के रोजगार और भयमुक्त प्रशासन की प्रार्थना की। बाद में मतदान केंद्र क्रमांक 158 पर पहुँचकर उन्होंने भाजपा को भरपूर समर्थन मिलने का दावा किया।


सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, अधिकारियों की पैनी नजर

स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिले के सभी 291 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने संवेदनशील क्षेत्रों में कई मतदान केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने सभी केंद्रों पर सुचारु रूप से मतदान चलने की पुष्टि की है।


भाजपा के लिए वर्चस्व तो कांग्रेस के लिए गढ़ बचाने की अग्निपरीक्षा

मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव अब केवल सत्ता का चुनाव नहीं, बल्कि साख और स्वाभिमान की बड़ी लड़ाई बन चुका है। मतदान की तारीख (30 जुलाई) जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। भाजपा और कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को चुनावी मैदान में झोंक दिया है, वहीं आजाद समाज पार्टी और ट्रांसजेंडर प्रत्याशी संजना सिंह की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है।


नरोत्तम मिश्रा पर आशुतोष को जिताने का जिम्मा

सत्तारूढ़ दल भाजपा ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ताबड़तोड़ दौरों के बाद, रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बसई पहुँचकर प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में माहौल बनाया। पार्टी ने इस सीट के प्रमुख दावेदार रहे पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 'चुनाव संचालन समिति' का प्रमुख बनाकर एक बड़ा संदेश दिया है। आशुतोष तिवारी को जिताने की जिम्मेदारी अब पूरी तरह नरोत्तम मिश्रा के कंधों पर है, जो अपनी राजनीतिक कुशलता के लिए जाने जाते हैं।


जीतू-उमंग की जोड़ी और 'सेंधमारी' का दांव

प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को प्रत्याशी बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। कांग्रेस ने भाजपा को स्थानीय स्तर पर बड़ा झटका देते हुए नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष स्व. लख्खा तलवानी की बेटी ज्योत्साना तलवानी को पार्टी में शामिल कर लिया है, जो भाजपा पार्षद की बेटी हैं। इसके अलावा, चंबल के पूर्व बागी मलखान सिंह का कांग्रेस के मंच से भाषण देना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।


दामोदर यादव और संजना सिंह: नए समीकरणों की दस्तक

इस उपचुनाव में दो अन्य नाम लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं:

  • दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी): नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दतिया में दो बार दौरा कर दामोदर यादव के लिए माहौल बनाया है। वे वंचित और पिछड़े वर्गों के वोट बैंक में सेंध लगाकर भाजपा-कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में हैं।
  • संजना सिंह (भारतीय गण वार्ता पार्टी): मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी और महामंडलेश्वर संजना सिंह समाज में किन्नर समुदाय के प्रति नजरिया बदलने के एजेंडे के साथ उतरी हैं। ढोलक की थाप पर प्रचार कर रहीं संजना को साध्वी सौम्या दीदी का भी समर्थन प्राप्त है।


संख्यात्मक समीकरण

उपचुनाव में कुल 21 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 2 प्रमुख दल, 9 क्षेत्रीय दल और 10 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। दतिया के इतिहास में निर्दलीय प्रत्याशी अक्सर जीत-हार का अंतर तय करते रहे हैं।


परंपरा या बदलाव?

हर पहलू का विश्लेषण करें तो साफ है कि दतिया का मुकाबला अब केवल दो दलों की पारंपरिक जंग तक सीमित नहीं है। एक तरफ भाजपा के लिए सत्ता का वर्चस्व साबित करना है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए अपना गढ़ बचाना। वहीं, संजना सिंह और दामोदर यादव जैसे विकल्प मतदाताओं के सामने एक नया प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। 30 जुलाई का मतदान ही तय करेगा कि दतिया की जनता पारंपरिक राजनीति पर मुहर लगाती है या बदलाव के किसी नए युग की शुरुआत करती है।