मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि हमारे 9 में से 6 सांसद अनैतिक रूप से हमें छोड़कर गए हैं। उन्होंने गुरुवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हमने लोकसभा स्पीकर को सब कुछ बताया है। हमें उम्मीद है कि वह हमारी सुनेंगे।

आनंद दुबे ने कहा कि आखिर ऐसी क्या दिक्कत हो गई कि सांसद हमें बीच रास्ते में छोड़कर चले गए। आप हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते हैं और इसके बाद हमें छोड़कर चले जाते हैं। अगर आपको हमें छोड़कर जाना था तो हमारी टिकट पर चुनाव लड़ते ही नहीं। हमारे साथ रहना था, तो कम से 2029 तक हमारा साथ निभाते। अफसोस आपने ऐसा नहीं किया। मुझे लगता है कि ऐसा कोई नियम आना चाहिए कि आप जिसके टिकट पर चुनाव लड़कर आ रहे हैं, आप उनके साथ ही रहें या तो फिर चुनाव ही मत लड़िए।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने वेनेजुएला भूकंप को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, इस भूकंप में हजारों लोगों के मौत होने की आशंका जताई जा रही है। हम मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। एक देश होने के नाते दूसरे देश के प्रति सहानुभूति होनी चाहिए। वेनेजुएला से हमारे अच्छे संबंध रहे हैं। उससे हम तेल लेते रहे हैं। हमें लगता है कि आज वहां पर आपदा आई है, तो हमें उनकी मदद करनी चाहिए। अमेरिका वेनेजुएला के करीब है। इसके अलावा, यूरोप के कई अन्य देश भी अमेरिका के करीब है। ऐसी स्थिति में सभी देशों को एकजुट होकर अमेरिका की मदद करनी चाहिए। हमारी सरकार को भी उनकी मदद करनी चाहिए, यही मानवता है। जब कभी दुनिया के किसी देश पर संकट आया है तो भारत मदद के लिए आगे आया है। आज वेनेजुएला पर संकट आया है। ऐसी स्थिति में हम उनके लिए अपने दिल में सद्भावना रखते हैं। हम उनके साथ खड़े हैं।

आनंद दुबे ने इमजरेंजी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे काला दिन बताते हुए कहा कि आज ही के दिन 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाई थी। आपाताकाल किन हालातों में लगाई गई थी, यह हम सभी को पता है। अब हमें इस बात पर ध्यान रखना होगा कि सरकार को इमरजेंसी लगाने की नौबत नहीं आए। लोकतंत्र अजर अमर रहना चाहिए। लोकतंत्र में सभी को अधिकार मिलना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, जिस तरह से बिहार में भरत तिवारी का एनकाउंटर किया गया। यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि फर्जी एनकाउंटर है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। आने वाले दिनों में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा होनी चाहिए। हमें लगता है कि इमरजेंसी से हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए।

वहीं, उन्होंने नीट पेपर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, नीट का पेपर पहले भी हो जाना चाहिए था। एक बार पहले ही नीट का पेपर हो चुका है। जब विपक्ष ने आवाज उठाया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो, उसके बाद फिर से पेपर हुए। अच्छे से हुए। अगर हम चाहते तो पेपर लीक को रोक सकते थे। हम अपने मासूम बच्चों के आत्महत्या को रोक सकते थे। उन्होंने जो सुसाइड किया, उसे रोका जा सकता था। उनके मन में जो गहरी चोट पहुंची, उसे रोक सकते थे। अब प्रधानमंत्री खुशी मना रहे हैं कि यह परीक्षा अच्छे से हो गई तो मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह कोई खुशी का विषय नहीं है। यह आत्मचिंतन का विषय है। आखिर ऐसी क्या स्थिति कि हम परीक्षा भी नहीं करवा पा रहे हैं और अगर करवा दे रहे हैं, तो उसकी खुशी मना रहे हैं। जब तक एनटीए पर कार्रवाई नहीं होगी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। तब तक लोगों को यह विश्वास नहीं होगा कि केंद्र सरकार कुछ करना चाहती है। अंत में यही होगा कि केंद्र सरकार अपने ही मंत्रियों को बचाना चाहती है।

मुंबई के सिविक अधिकारियों की मॉनसून के दौरान कुप्रबंधन और नाले में हुए हादसे को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियों के लिए आलोचना हुई। इस पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, मुंबई के महापौर ने जिस प्रकार से यह बताने की कोशिश की है कि वो व्यक्ति जो नाले में गिरा हुआ है, वो नाटक कर रहा है। यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पहले जब इस तरह के हादसे होते थे, तो आज जो लोग सत्ता में हैं, वही हमें कोसा करते थे कि हमारे शासनकाल में लोगों की मौतें हो रही हैं। यह बयान ठीक नहीं है। आपको नगर निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि आप लोगों के हित के लिए काम करें। लेकिन, ऐसा नहीं करके अपनी विफलता को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नाले की सफाई होनी चाहिए थी, उस प्रकार नहीं हो पाई। इस बार मानसून देर में आया। आपके पास पूरा बंदोबस्त करने का पर्याप्त समय था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जिस व्यक्ति को आप नाटक बता रहे हैं। अगर वो व्यक्ति खुद सामने आकर कह दे कि नहीं मैं सच में गिरा था, तब आप क्या कहेंगे। इससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार अहंकार में है। सरकार का रवैया तानाशाही से भरा हुआ है।