नई दिल्ली। भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन, राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष के आरोप, भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले समेत कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य लोकतंत्र और समाज को मजबूत करना है। वहीं, विपक्ष बेवजह राजनीतिक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।131वें संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन के मुद्दे पर सुब्रत पाठक ने कहा कि सरकार देश और समाज के हित में जो भी आवश्यक होगा, वही करेगी। महिलाओं से जुड़े विधेयक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही अपना संकल्प स्पष्ट कर चुके हैं। पिछली बार विपक्ष के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका था, लेकिन सरकार इसे दोबारा लाने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि यह विधेयक इस बार संसद से पारित हो जाता है, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़े विवाद पर विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चोरी की घटना बेहद निंदनीय है, लेकिन भाजपा सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी का गठन किया, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया और वसूली की कार्रवाई भी जारी है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए, उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल कभी भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, आज वही राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के पुराने हलफनामे और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष पहले यह स्पष्ट करे कि वह अयोध्या में राम मंदिर के अस्तित्व को स्वीकार करता है या नहीं। विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पर रोक के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुब्रत पाठक ने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र का विषय है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व में लिया गया निर्णय विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।

भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य समुदाय को पूजा या नमाज के लिए स्थान देना है तो भोजशाला परिसर के बाहर व्यवस्था की जा सकती है। भोजशाला के भीतर मंदिर है और यदि मंदिर के अंदर नमाज की अनुमति दी जाती है तो फिर अन्य धार्मिक स्थलों पर भी समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल के विपक्ष के आरोपों को भी उन्होंने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि जो दल स्वयं लंबे समय तक राजनीति के लिए संस्थाओं का उपयोग करते रहे हैं, उन्हें अब हर कार्रवाई में राजनीति दिखाई देती है। भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं बल्कि कानून के अनुसार काम कर रही है।

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता जयंत पाटिल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद लगाई जा रही राजनीतिक अटकलों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष की लगातार राजनीतिक विफलताओं और कांग्रेस नेतृत्व की कमजोरी के कारण इस तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राहुल गांधी को कई बार राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह सफल नहीं हुए। देश ही नहीं, दुनिया भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास करती है और उनकी लोकप्रियता के कारण विपक्ष लगातार कमजोर होता जा रहा है। महाराष्ट्र की मुलाकातों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।