भोपाल, जीतेन्द्र यादव। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, प्रदूषण में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इथेनॉल का विरोध करना किसानों के हितों का विरोध करने जैसा है। उन्होंने बताया कि उनकी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात हुई, जिसमें प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
रेड्डी ने बताया कि उन्होंने मुरैना स्थित बंद पड़ी शुगर फैक्ट्री का निरीक्षण किया है, जो वर्ष 2008 से बंद है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में यह फैक्ट्री दोबारा शुरू हो सकती है। उनका कहना था कि किसानों की इच्छा है कि शुगर फैक्ट्री का संचालन सहकारी समिति (कोऑपरेटिव) के माध्यम से हो, न कि एमएसएमई या निजी क्षेत्र को सौंपा जाए।
उन्होंने कहा कि देशभर की शुगर फैक्ट्रियों में गन्ने के रस से 100 प्रतिशत इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इसके अलावा मक्का और चावल जैसी फसलों से भी इथेनॉल तैयार किया जा सकता है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
के. साईं रेड्डी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने वर्ष 2005 में ही पेट्रोल में 5 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में इथेनॉल के विरोध में चल रहा अभियान तथ्यहीन है और इससे किसानों का नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में करीब 20 नई इथेनॉल एवं शुगर आधारित फैक्ट्रियां स्थापित होने की संभावना है, जिनसे लगभग 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पेट्रोल में लगभग 30 प्रतिशत इथेनॉल का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय भी बढ़ी है।




