कोलकाता। नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने बुधवार को नीदरलैंड की एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स ने किया।गृह मंत्रालय ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसमें एनसीबी और अन्य एजेंसियां अहम भूमिका निभा रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने ड्रग तस्करी की मौजूदा स्थिति, कानूनी ढांचे, परिचालन चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और उभरते खतरों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने मादक पदार्थों और संगठित अपराध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

एनसीबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने नारकोटिक्स नियंत्रण और सहयोग के लिए एक संभावित समझौता ज्ञापन पर भी चर्चा की।

अधिकारियों ने बताया कि भारत से नीदरलैंड की ओर अक्सर डिजाइनर ड्रग्स बनाने के लिए जरूरी केमिकल प्रीकर्सर की तस्करी होती है, जबकि एमडीएमए और एलएसडी जैसे सिंथेटिक नशीले पदार्थ नीदरलैंड से डार्कनेट के माध्यम से भारत में पहुंचते हैं।

एनसीबी लगातार ऐसे अवैध केमिकल्स और सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क को रोकने के प्रयास कर रहा है। दोनों देशों की एजेंसियां खुफिया जानकारी साझा करने और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर नियंत्रण को लेकर सहयोग बढ़ा रही हैं।

सिंथेटिक ड्रग्स भारत में एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं, खासकर शहरी और शिक्षित युवाओं में इसकी मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, भारत का इस्तेमाल कई बार बांग्लादेश में ड्रग तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में भी किया जाता है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में मादक पदार्थों की तस्करी के तार आतंकवाद की फंडिंग से जुड़े पाए गए हैं। भारत इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।