भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शिता और रणनीतिक चालबाजी के आगे कांग्रेस एक बार फिर गई है। जब BJP ने तीसरे राज्यसभा प्रत्याशी मैदान में उतारा, तब से कांग्रेस की नींद उड़ी हुई थी। CM मोहन यादव ने साफ-साफ संकेत दे दिया था कि "तीसरी सीट कहां जाएगी" और अब वही हुआ भी । कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर BJP की आपत्ति के बाद नामांकन निरस्त हो गया है CM डॉ. मोहन यादव ने BJP के दो प्रत्याशियों (तरुण चुघ और राजनीश अग्रवाल) के नामांकन के बाद तीसरे उम्मीदवार का ऐलान कर कांग्रेस को चौंका दिया।


उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि तीसरी सीट BJP के खाते में ही जाएगी। उनकी इस भविष्यवाणी ने कांग्रेस को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। BJP ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें तेलंगाना के एक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया। यह कदम CM मोहन यादव की नेतृत्व क्षमता और पार्टी की एकजुटता का प्रतीक है। मोहन यादव जी की रणनीति ने साबित कर दिया कि BJP न सिर्फ संख्या बल पर, बल्कि बुद्धिमत्ता और तैयारी पर भी भरोसा रखती है। कांग्रेस की ओर से MLAs को कर्नाटक रिसॉर्ट भेजने जैसे कदम यह दिखाते हैं कि पार्टी में घबराहट का माहौल है।


कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूरी पार्टी इस पूरे मामले में बुरी तरह फंस गई। नामांकन दाखिल करते समय दिग्विजय सिंह, उमंग सिंघार समेत बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन तैयारी इतनी कमजोर निकली कि BJP के आपत्ति के बाद नामांकन पर सवालिया निशान लग गया। जबकि कांग्रेस "तैयारी के साथ" मैदान में उतरने का दावा करती रही। यह कांग्रेस के लिए न सिर्फ एक नामांकन का मुद्दा है, बल्कि पूरी पार्टी की विश्वसनीयता और संगठनात्मक कमजोरी का प्रतीक बन गया है। जीतू पटवारी की अगुवाई में कांग्रेस एक बार फिर रणनीतिक रूप से पिछड़ती दिख रही है डॉ. मोहन यादव की लोकप्रियता और निर्णायक नेतृत्व BJP को लगातार मजबूती दे रहा है। मध्य प्रदेश की जनता देख रही है कि कैसे एक मजबूत, दूरदर्शी और विकासोन्मुखी सरकार विपक्ष की चालों को पलट देती है।