भोपाल। छतरपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के कथित रिश्वत संवाद का स्टिंग ऑपरेशन वीडियो सामने आने के बाद मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सीधी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग को कटघरे में खड़ा किया है।
स्टिंग वीडियो और मुख्य आरोप
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में छतरपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया के दौरान रिश्वत की राशि पर बात करते नजर आए हैं। भर्ती नियमों के अनुसार मेरिट सूची में प्रथम स्थान पाने वाले योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी थी। आरोप है कि पैसों के दम पर अपात्रों का चयन किया गया और पात्र अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। पूर्व सीएम कमलनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य में पारदर्शी व्यवस्था के बजाय रिश्वत आधारित नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे योग्य और गरीब अभ्यर्थियों के अधिकार मारे जा रहे हैं।
विपक्ष की प्रमुख मांगें
1. प्रदेशव्यापी जांच की मांग
कांग्रेस और विपक्ष की मुख्य मांग है कि केवल छतरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में हुई सभी 2,548 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई
सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्टिंग वीडियो में शामिल छतरपुर DPO और प्रक्रिया से जुड़े अन्य संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों पर तत्काल केस दर्ज कर उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
3. मेरिट सूची की पुनरसमीक्षा
जिन भी जिलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर धांधली के आरोप लगे हैं, वहां की भर्ती सूचियों की फिर से पारदर्शी तरीके से जांच की जाए और केवल वास्तविक व योग्य पात्र अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति दी जाए।
भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक रुख
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पदों के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समितियां चयन प्रक्रिया संचालित करती हैं। विवाद और वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शिकायतों के आधार पर जांच कराने और दोषियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की बात कही जा रही है।




