भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत से सक्रिय हो गया है। डिंडौरी जिले में शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच रिकॉर्ड 6 इंच की मूसलाधार बारिश दर्ज की गई, जिससे बजाग, करंजिया और समनापुर ब्लॉक में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। बारिश के कारण जबलपुर और मंडला मार्ग पर स्थित खरमेर नदी उफान पर आ गई, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 8 घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। यह मार्ग दोपहर बाद सामान्य हो सका।


नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा, निचले इलाकों में अलर्ट

लगातार हो रही बारिश से नर्मदा नदी का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है। तटीय और निचले इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से अलर्ट जारी किया गया है। खतरे की आशंका को देखते हुए डिंडौरी के निचले इलाकों में रहने वाले 7 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए रैन बसेरों में शिफ्ट किया गया है। इसके अतिरिक्त डिंडौरी के सिधौली में खुले में रखी लगभग 50 ट्रक धान भी भीगने के कारण खराब हो गई।


प्रदेश भर का मौसम और तीन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार राज्य में वर्तमान में मानसून ट्रफ सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से लो प्रेशर एरिया तैयार हो गया है। इसके प्रभाव से दतिया, रीवा और सीधी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक औसत से कम बारिश दर्ज हुई है, जबकि केवल ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन जिलों में ही सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।


प्रमुख शहरों में अगस्त की बारिश के ऐतिहासिक आंकड़े

प्रदेश के बड़े शहरों में अगस्त के दौरान ऐतिहासिक रूप से भारी बारिश का दौर देखने को मिलता रहा है। भोपाल में अगस्त माह में औसतन 14 दिन बारिश होती है और वर्ष 2006 में यहां 35.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना था। जबलपुर में 102 साल पहले वर्ष 1923 के अगस्त महीने में 44 इंच बारिश का ऑल-टाइम रिकॉर्ड दर्ज है, जिसमें 24 घंटे के भीतर ही 13 इंच पानी गिरा था।


इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में बारिश का रिकॉर्ड

इंदौर शहर में वर्ष 1944 के अगस्त महीने में सर्वाधिक 28 इंच बारिश हुई थी, जबकि 22 अगस्त 2020 को एक ही दिन में 10.5 इंच पानी गिरा था। ग्वालियर में 10 अगस्त 1927 को 24 घंटे के भीतर 8.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। वहीं उज्जैन में वर्ष 2006 के अगस्त महीने में रिकॉर्ड 35 इंच बारिश हुई थी। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह नया सिस्टम और मजबूत होगा, जिससे पूरे मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा।