शाहगढ़ (सागर)। सागर जिले के शाहगढ़ कस्बा स्थित मुख्य बाजार से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद खतरनाक और गंभीर तस्वीर सामने आई है। शाहगढ़ के बीच बाजार में 'पाल हॉस्पिटल' नाम से एक निजी अस्पताल का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। यहाँ कथित डॉक्टर द्वारा बिना किसी वैध डिग्री और पंजीयन के मरीजों को भर्ती कर उनका मनमर्जी से गंभीर उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध खेल में मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने की बात भी सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है 'पाल हॉस्पिटल'
पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में इस अस्पताल का कोई आधिकारिक पंजीयन (Registration) दर्ज नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में शाहगढ़ में 'पाल हॉस्पिटल' नाम का कोई भी पंजीकृत अस्पताल मौजूद ही नहीं है। इसके बावजूद मुख्य बाजार जैसे व्यस्ततम इलाके में खुलेआम मरीजों को भर्ती करना, उन्हें बोतल चढ़ाना और उनका इलाज करना स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
मासूम बच्चों को चढ़ाई जा रही थीं ड्रिप, कैमरे से भागता दिखा कथित डॉक्टर
जब मीडिया टीम ने मौके पर पहुँचकर पड़ताल की, तो अस्पताल के अंदर का नजारा बेहद भयावह था। वहाँ छोटे-छोटे मासूम बच्चों को भर्ती कर उन्हें बिना किसी बाल रोग विशेषज्ञ की देखरेख के बोधहीन तरीके से ड्रिप (बोतल) चढ़ाई जा रही थी। जब मौके पर मौजूद कथित डॉक्टर से अस्पताल के रजिस्ट्रेशन, डिग्री और आपातकालीन सुविधाओं को लेकर सवाल पूछे गए, तो वह गोल-मोल जवाब देने लगा। इतना ही नहीं, अपनी पोल खुलती देख कथित डॉक्टर मीडिया के कैमरों का सामना करने से बचता और भागता नज़र आया, जिससे साफ जाहिर होता है कि यहाँ मरीजों की जान से खिलवाड़ का खेल धड़ल्ले से चल रहा था।
इमरजेंसी में उठ सकता है बड़ा जोखिम, CMHO ने दिए कार्रवाई के निर्देश
अवैध रूप से संचालित हो रहे इस अस्पताल में यदि उपचार के दौरान किसी मरीज या मासूम बच्चे की हालत अचानक बिगड़ जाती, तो वहाँ न तो कोई आपातकालीन जीवन रक्षक उपकरण मौजूद थे और ना ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर। इस गंभीर मामले को लेकर जब सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. देवेश पटेरिया से सीधी बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि पाल हॉस्पिटल नाम का कोई भी संस्थान स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है। उन्होंने मामले की तत्काल जांच कराकर अवैध अस्पताल के खिलाफ सीलिंग और एफआईआर की नियमानुसार कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।




