नई दिल्ली। महाराष्ट्र में 28 जून को आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को कथित पेपर लीक की आशंका के चलते स्थगित करने के बाद सियासी बयानबाजी तेज है। पूर्व मंत्री अनिल देशमुख और कांग्रेस नेता नसीम खान ने मामले को शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की।
नागपुर में आईएएनएस से बातचीत में अनिल देशमुख ने कहा कि टीईटी का पेपर लीक होने की खबर बेहद चिंताजनक है। पिछले कुछ वर्षों में नीट, सीबीएसई, यूपीएससी और एसएससी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं से जुड़े विवाद सामने आए हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। अब जानकारी सामने आ रही है कि रविवार को होने वाली टीईटी का पेपर भी लीक हो गया। इससे पहले नीट को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए थे। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में भी समय-समय पर अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। सरकार को इस पूरे मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र महीनों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की खबर आती है तो मेहनत करने वाले छात्रों का मनोबल टूटता है और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। देशमुख ने कहा कि उन्होंने करीब नौ वर्षों तक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली और उस दौरान लाखों छात्रों की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं आयोजित कराई गईं। हमारे समय पूरी शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र परीक्षा प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखता था। लाखों विद्यार्थियों की परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित होती थीं और इस प्रकार की घटनाएं सामने नहीं आती थीं।
अनिल देशमुख ने कहा कि यह मांग केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच भी उठ रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। बार-बार सामने आने वाले परीक्षा विवादों को रोकने के लिए सरकार को सख्त और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
वहीं, कांग्रेस नेता नसीम खान ने भी टीईटी पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि परीक्षा का स्थगित होना शिक्षा प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है। जिस तरह टीईटी का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा स्थगित करनी पड़ी, वह बेहद चिंताजनक है। छात्रों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उसके लिए जिम्मेदार कौन है? यह सरकार की जिम्मेदारी है और यह शिक्षा विभाग की विफलता को उजागर करता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों के भविष्य का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का विषय है और पार्टी लगातार इसे उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मामले में अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने से बच रही हैं। देश के कई हिस्सों से छात्रों की परेशानियों की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन, जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई करने के मामले में सरकारें गंभीर नहीं दिखतीं।

