मंदसौर के 'चिराग' रोशन कर रहे मायानगरी, मंदसौर से मुंबई तक गूंजा नाम

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नाहरगढ़/मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। यह महज एक करियर की सफलता नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण युवाओं के सपनों की जीत है जो बड़े शहरों की चमक-धमक के बीच अपनी पहचान बनाने का साहस करते हैं। मंदसौर जिले के नाहरगढ़ के रहने वाले चिराग सिंह (चिराग मधुराम सिंह) ने टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित चैनल 'स्टार प्लस' के लोकप्रिय धारावाहिक 'झनक' में 'श्रृंखला डायरेक्टर' (Series Director) की कमान संभालकर इतिहास रच दिया है।
TRP की रेस में टॉप पर 'झनक', पीछे चिराग का विजन
हर सोमवार से शनिवार रात 10:30 बजे प्रसारित होने वाला शो 'झनक' आज देश के हर घर की पसंद बन चुका है। इस शो की सफलता, इसकी भावनात्मक गहराई और किरदारों की जीवंतता के पीछे चिराग सिंह की रचनात्मक सोच काम कर रही है। एक डायरेक्टर के तौर पर वे न केवल कैमरे के पीछे खड़े होते हैं, बल्कि कहानी की रूह को पर्दे पर उतारते हैं। कलाकारों से बेहतरीन अभिनय निकलवाना और दर्शकों को हर पल कहानी से जोड़े रखना उनकी सबसे बड़ी खूबी है।
सीमित संसाधनों से नेशनल टीवी के सफर तक
पिता रामचरण सिंह मंडलोई के संस्कारों में पले-बढ़े चिराग का सफर आसान नहीं था। नाहरगढ़ जैसे छोटे कस्बे से निकलकर मुंबई की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में जगह बनाना एक कड़ा संघर्ष था। लेकिन कला के प्रति उनके जुनून ने हर मुश्किल को आसान कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी छाप छोड़ी हो, इससे पहले वे स्टार प्लस के ही धारावाहिक 'ईशानी' का भी सफल निर्देशन कर चुके हैं।
पूरे अंचल में गौरव और खुशी की लहर
जैसे ही यह खबर नाहरगढ़ पहुँची, समूचे मंदसौर अंचल में जश्न का माहौल बन गया। सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा हुआ है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चिराग ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का मान बढ़ाया है। युवाओं के लिए वे एक जीवंत उदाहरण बन गए हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।
चिराग सिंह मंडलोई की यह उपलब्धि बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो नाहरगढ़ की मिट्टी से भी 'नेशनल कमांडर' निकल सकते हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा की एक नई रोशनी है।

