इंफाल। कांगपोकपी जिले में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन जनजीवन प्रभावित रहा। कुकी समुदाय के दो युवाओं की हत्या के मामले में मणिपुर सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के विरोध में एक आदिवासी संगठन ने बंद जारी रखा।एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शटडाउन के कारण दुकानें, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
नेशनल हाईवे-2 (एनएच-2) से इंफाल जा रहे सामान से लदे कई वाहन कांगपोकपी जिले में प्रवेश नहीं कर सके और पड़ोसी सेनापति जिले में फंस गए, जहां मुख्य रूप से नागा समुदाय के लोग रहते हैं।
उन्होंने बताया कि शटडाउन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहाड़ी कांगपोकपी जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
कुकी – जो समुदाय के एक प्रमुख संगठन, 'कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी' (सीओटीयू), ने यह शटडाउन बुलाया था। संगठन का आरोप है कि दो कुकी नागरिकों की हत्या के मामले में राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया है।
28 अक्टूबर को लापता हुए दो कुकी युवाओं के शव एक नवंबर को बरामद किए गए। इन शवों को मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), कोबरा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों द्वारा चलाए गए कई तलाशी अभियानों के बाद खोजा गया।
शवों के मिलने के बाद सीओटीयू ने कांगपोकपी जिले में रविवार से 24 घंटे के शटडाउन का आह्वान किया था। बाद में सोमवार की शाम को संगठन ने इस शटडाउन को 48 घंटे और बढ़ा दिया। उनका आरोप है कि सरकार ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
कुकी संगठन ने एक बयान में कहा कि शटडाउन को इसलिए बढ़ाया गया है, क्योंकि सरकार का रवैया 'शर्मनाक तरीके से अनिर्णायक' रहा है, उनकी 'चुप्पी अस्वीकार्य है' और वे 'दो निर्दोष कुकी-जो नागरिकों की क्रूर और अमानवीय हत्या' के मामले में न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करने में लगातार विफल रहे हैं।
आदिवासी संगठन ने आगे कहा कि कुकी-जो समुदाय के लोग 'न्याय के बदले खोखले आश्वासनों और प्रशासनिक बहानेबाजी' को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने की मांग की।
इस बीच, दो लापता युवाओं के शव मिलने से संघर्ष प्रभावित राज्य में तनाव बढ़ गया है। यहां जातीय विभाजन और सुरक्षा संबंधी चिंताएं प्रशासन के लिए गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।
मणिपुर की उप मुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने इससे पहले संबंधित अधिकारियों से अपील की थी कि वे 28 अक्टूबर की शाम कांगपोकपी जिले से लापता हुए दो कुकी युवाओं को खोजने और बचाने के लिए हर संभव प्रयास करें।
अपने एक पिछले बयान में किपजेन ने बुधवार शाम तफौ कुकी गांव के पास से इन दो युवाओं के कथित अपहरण की कड़ी निंदा की थी।
लापता हुए इन दो लोगों की पहचान टिंगिनलन चोंगलोई (21) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि कथित तौर पर अज्ञात उपद्रवियों ने इनका अपहरण कर लिया था।
एक अन्य उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नागा नेता लोसी डिखो ने भी इन दो युवाओं की हत्या की निंदा की। बताया जा रहा है कि इस साल फरवरी से नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई झड़पों में 50 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और दर्जनों घरों को आग लगा दी गई है।
यह हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी और तामेंगलोंग जिलों, नोनी जिले और सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है।
वहीं, घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच चल रहा बड़ा जातीय संघर्ष, जो मई 2023 में शुरू हुआ था, अब तक कम से कम 310 लोगों की जान ले चुका है। इसके अलावा, 49 लोग अभी भी लापता हैं और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।













