नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी-2026 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की ऊर्जा उपलब्धियों और भावी कार्य योजनाओं को देश-विदेश के नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के सामने मजबूती से रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक देश के 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
सम्मेलन स्थल तक पहुँचने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली एयरपोर्ट से शिवाजी स्टेडियम तक दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से यात्रा की। दिल्ली मेट्रो में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उपयोग होता है, इसलिए उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा के प्रति राज्य की निष्ठा को दर्शाने के लिए यह संदेश दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी में दी प्रस्तुति
सम्मेलन के भव्य उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमार स्वामी, भूटान के ऊर्जा मंत्री एच.ई. ल्योनपो जेम त्शेरिंग और श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलका सहित मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 438 मेगावॉट से बढ़कर 11,000 मेगावॉट पहुँच गई है, जो लगभग 25 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि है। राज्य में लागू की गई निवेश-अनुकूल नीतियों, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास नीतियों के कारण प्रदेश अब ग्रीन एनर्जी हब के रूप में स्थापित हो चुका है।
विश्वभर में मिसाल बनी रीवा, आगर-शाजापुर-नीमच और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएँ
डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के प्रमुख सौर प्रोजेक्ट्स की सफलता का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि 750 मेगावॉट की रीवा अल्ट्रा मेगा सौर परियोजना ने देश में पहली बार कोयला आधारित बिजली से भी सस्ता सौर टैरिफ स्थापित किया था। इस प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेंट्स अवार्ड मिल चुका है और इसकी केस स्टडी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है।
इसके अलावा, 1,500 मेगावॉट की आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना में 2.14 रुपये प्रति यूनिट का रिकॉर्ड न्यूनतम टैरिफ प्राप्त हुआ, जिससे भारतीय रेलवे को 8 राज्यों में हरित ऊर्जा दी जा रही है। 278 मेगावॉट क्षमता की देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना का लोकार्पण 25 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा चुका है। वहीं 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' के तहत 14,900 मेगावॉट क्षमता के प्रस्ताव मिले हैं।
24 घंटे सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम जारी
ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए मध्यप्रदेश अब बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर जोर दे रहा है। मुरैना की 440 मेगावॉट सौर ऊर्जा और 880 मेगावॉट-घंटा बैटरी भंडारण परियोजना राज्य की पहली ऐसी पहल है, जहाँ प्रतिस्पर्धी दरों पर अनुबंध हुए हैं। राज्य में अब 4 घंटे, 6 घंटे और चौबीसों घंटे (24 घंटे) बिजली देने वाली सौर-सह-ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर काम चल रहा है। घरों और सरकारी भवनों की बात करें तो रूफटॉप सोलर योजना के तहत 1,300 शासकीय भवनों पर 48 मेगावॉट क्षमता और 'प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के अंतर्गत राज्य के करीब 1.5 लाख घरों में 566 मेगावॉट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने की मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत बहुत जल्द 300 गीगावॉट स्थापित गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार करने वाला है। 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से देश के 50 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और पर्यावरण संरक्षण में मध्यप्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और अन्य राज्यों को भी ऐसे मॉडल अपनाने का आह्वान किया।
परियोजनाओं के क्रियान्वयन में NRED और RUMSL निभा रहे मुख्य भूमिका
मध्यप्रदेश में हरित क्रांति लाने के पीछे दो प्रमुख संस्थाएं निरंतर काम कर रही हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (NRED) राज्य में नीतियों के निर्माण, निवेश प्रोत्साहन और परियोजना विकास के लिए नोडल विभाग है। दूसरी ओर, रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL), जो मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम और SECI का संयुक्त उपक्रम है, राज्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर और 24 घंटे ऊर्जा भंडारण वाली परियोजनाओं के निष्पादन का कार्य संभाल रहा है। RUMSL के नवाचारों के चलते ही राज्य आज देश में ग्रीन स्टोरेज का लीडर बनकर उभरा है।




