भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योग, निवेश और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने बताया कि कपास पर मंडी शुल्क कम कर कॉटन इंडस्ट्री को नई गति देने का प्रयास किया गया है, जिससे कपास उत्पादक किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। वहीं अरहर (तुअर) दाल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रयास किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते एक वर्ष में एमएसएमई सेक्टर, उद्योगों और स्टार्टअप्स को लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है। महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में प्रदेश में 4 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों का संचालन महिलाओं के नेतृत्व में हो रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक जिले और क्षेत्र में उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और मध्यप्रदेश भी निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। केवल एमएसएमई ही नहीं, बल्कि देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां भी प्रदेश में निवेश कर रही हैं। अब तक करीब 9,300 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है, जबकि कई बड़े निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं। इसी क्रम में प्रदेश में सात नए औद्योगिक क्षेत्रों का भूमिपूजन भी किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगपति केवल उद्योग नहीं लगाते, बल्कि हजारों परिवारों को रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में आयोजित होगी। साथ ही वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश को 20 नए जीआई (Geographical Indication) टैग मिलने की दिशा में भी सरकार तेजी से कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।

