जबलपुर में 'जमीन' की जंग: डॉ. हेमलता के निधन के बाद 25 हजार वर्गफीट की प्रॉपर्टी सील, दान और वसीयत पर गहराया विवाद

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जबलपुर। राइट टाउन इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने दिवंगत वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की बेशकीमती संपत्ति पर ताला जड़ दिया। रविवार शाम डॉक्टर साहिबा के निधन और सोमवार को उनके अंतिम संस्कार के ठीक बाद, कलेक्टर के निर्देश पर देर रात यह बड़ी कार्रवाई की गई। लगभग 25 हजार वर्गफीट जमीन और उस पर बने आलीशान भवन को सील करते हुए नगर निगम ने नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह संपत्ति लीज की शर्तों के उल्लंघन और अवैध हस्तांतरण के संदेह के घेरे में है।
गौरी घाट में अंतिम विदाई और पीछे छूट गई करोड़ों की जायदाद
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का जीवन अंतिम समय में काफी एकाकी रहा। दिसंबर 2025 में उनके पति के निधन और उससे पहले बेटे को खो देने के बाद वे घर में अकेली रह रही थीं। सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद उनकी छोटी बहन और गायत्री परिवार के सदस्यों ने गौरी घाट पर उन्हें मुखाग्नि दी। अभी उनकी चिता की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि उनकी करोड़ों की संपत्ति के वारिसों और दावेदारों के बीच कानूनी खींचतान सड़क पर आ गई।
गिफ्ट डीड और ट्रस्ट के दावों पर सवाल
डॉक्टर की मौत के बाद संपत्ति को लेकर दावों की झड़ी लग गई है। गायत्री मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि डॉक्टर अपनी पूरी जायदाद ट्रस्ट को सौंपना चाहती थीं। वहीं, डॉ. सुमित जैन ने दावा पेश किया है कि 2 जनवरी को डॉ. हेमलता ने मेमोरियल हॉस्पिटल बनाने के लिए उन्हें 11,000 स्क्वायर फीट जमीन दान में दी थी। हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सदस्यों ने इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। IMA का कहना है कि डॉक्टर की खराब शारीरिक और मानसिक सेहत का फायदा उठाकर उनसे जबरन डोनेशन डीड पर साइन करवाए गए, जिसके चलते डॉ. सुमित जैन और उनकी पत्नी के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है।
लीज उल्लंघन और नगर निगम की सख्ती
नगर निगम के मुताबिक, राइट टाउन एक्सटेंशन स्थित यह प्लॉट सरकारी जमीन है। नियमों के अनुसार, लीज की जमीन को बिना निगम की अनुमति के किसी को दान या गिफ्ट नहीं किया जा सकता। जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2020-21 से इस जमीन का किराया नहीं भरा गया है और यहां बिना इजाजत कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही थीं। असिस्टेंट कमिश्नर शिवांगी महाजन ने संबंधित पक्षों को 24 घंटे के भीतर कानूनी दस्तावेज जमा करने का अल्टीमेटम दिया है।
अगली सुनवाई 27 फरवरी को
प्रशासन ने फिलहाल पूरी संपत्ति को अपनी कस्टडी में ले लिया है ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो सके। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को आधारताल एसडीएम कोर्ट में होगी। सीनियर सिटिजन्स मेंटेनेंस एक्ट और लीज की शर्तों के आधार पर यह तय होगा कि इस बेशकीमती जमीन का असली हकदार कौन है या फिर यह स्थायी रूप से सरकारी खाते में चली जाएगी।
