एमवाय अस्पताल में चूहों के बाद अब बिल्लियों का आतंक, वीडियो वायरल

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इंदौर,रविकांत वर्मा। इंदौर के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छह महीने पहले हुए चूहा कांड में दो नवजातों की मौत के बाद अब अस्पताल में बिल्ली कांड सामने आया है। बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली द्वारा बच्चों को जन्म देने का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल के अत्यंत संवेदनशील एचआईवी संक्रमित मरीजों के वार्ड और मेडिसिन कक्ष में भी बिल्लियों की आवाजाही जारी है। इससे दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा एचआईवी मरीजों को हर महीने हजारों रुपये की निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन एमवाय अस्पताल की ओपीडी में बिल्ली की आवाजाही और गंदगी के कारण ये दवाएं खराब होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से एचआईवी संक्रमित नवजात बच्चों को दी जाने वाली सेप्ट्रोन जैसी आवश्यक दवाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि एआरटी के एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी ही बिल्लियों की देखभाल करते पाए गए। अस्पताल में पहले भी पेस्ट एंड एनिमल कंट्रोल से जुड़ी बीवीजी हाउसकीपिंग कंपनी पर लापरवाही को लेकर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।
इस मामले में अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉ. अशोक यादव की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठे हैं। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इसे बड़ी लापरवाही माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि ओपीडी में बिल्ली के तीन बच्चे मिले हैं, जिनमें से दो को रेस्क्यू कर लिया गया है और तीसरे को हटाने के लिए पिंजरा लगाया गया है।
डीन ने कहा कि मरीजों के बीच बिल्लियों की मौजूदगी बीमारियों को बढ़ावा दे सकती है, इसलिए बीवीजी के कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अस्पताल में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न छोड़ रही हैं।
