रांची। झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ भाजपा राज्यव्यापी जनजागरण अभियान और ग्रासरूट लेवल पर जनसंघर्षों को गति देगी। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और चुनावी वादाखिलाफी जैसे मुद्दों पर पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।

यह संकल्प झारखंड भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिनों तक चली बैठक में पारित राजनीतिक प्रस्ताव लिया गया। पार्टी ने युवाओं, छात्रों, किसानों, महिलाओं और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष तेज करने का फैसला लिया है। रांची के सुकुरहुट्टू स्थित हवेली बैंक्वेट हॉल में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक के दूस दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया।

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और मधु कोड़ा तथा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और मंजू कुमारी ने इसका अनुमोदन किया। प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। उल्लेखनीय है कि कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा था कि बंगाल के बाद मिशन झारखंड को पार्टी के नेता-कार्यकर्ता सफल बनाएंगे। उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार पर जनाकांक्षाओं को रौंदने का भी आरोप लगाया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस वक्तव्य के अनुरूप रविवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि आज झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार के कुशासन, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बदहाल कानून-व्यवस्था से आहत है। भाजपा के संघर्ष और जनआकांक्षाओं से अस्तित्व में आए झारखंड की अस्मिता को वर्तमान सरकार की वादाखिलाफी और जनविरोधी नीतियों ने गहरी चोट पहुंचाई है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक संवेदनहीनता ने जनता की उम्मीदों को झकझोर दिया है।

प्रस्ताव पेश करते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य ठप हैं और सरकारी संसाधनों की लूट हो रही है। उन्होंने आदिवासियों की जमीन पर कथित कब्जे, खनिज संपदा के दुरुपयोग और घुसपैठ के मुद्दे उठाए। मरांडी ने एमएमडीआर अधिनियम का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस कानून को लेकर गलत नैरेटिव बना रही है। राजनीतिक प्रस्ताव में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर चुनावी वादों को बिसार देने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि प्रतिवर्ष पांच लाख नौकरियां देने, बेरोजगारी भत्ता, हर घर में सरकारी नौकरी, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण और किसानों को 3,200 रुपए प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य देने जैसे चुनावी वादे आज भी इस सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

भाजपा ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, छात्रवृत्ति, पेंशन, विस्थापितों के अधिकार और पलायन के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ा है और सरकारी योजनाओं में अनियमितताएं हो रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। प्रस्ताव में महिला सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और बदलती जनसांख्यिकी पर चिंता जताते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग की गई।

भाजपा ने संकल्प लिया कि वह सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करेगी और जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए संगठन को मजबूत करने और विकसित झारखंड के लक्ष्य के लिए काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को भी सुना।