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मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 640 अंक उछला

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PeptechTime
10 मार्च 2026, 02:00 pm IST
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मुंबई। मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते पिछले दिन की बड़ी गिरावट से उबरते हुए भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स 639.82 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,205.98 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 233.55 अंक यानी 0.97 प्रतिशत चढ़कर 24,261.60 के स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त होने के संकेत के बाद जोखिम भावना में सुधार होने से घरेलू बाजार ने लगातार दो दिनों की गिरावट को समाप्त कर दिया।


ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा बाजार में कई दिनों तक चले भारी उतार-चढ़ाव के बाद बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध का समाधान 'बहुत जल्द' हो सकता है। इस खबर से निवेशकों का मनोबल बढ़ा और उनमें जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।


दिन के कारोबार के दौरान बाजार में और ज्यादा तेजी देखने को मिली। इंट्राडे में सेंसेक्स करीब 960 अंक यानी लगभग 1.2 प्रतिशत उछलकर 78,526.25 तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 275.75 अंक यानी करीब 1.1 प्रतिशत बढ़कर 24,303.80 के स्तर तक पहुंचा। हालांकि बाद में दोनों सूचकांकों में थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई।व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में जहां 1.62 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.12 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।


सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी ऑटो इंडेक्स (3.10 प्रतिशत की तेजी) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बनकर उभरा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (बैंक को छोड़कर) इंडेक्स ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, निफ्टी बैंक में 1.66 प्रतिशत, तो निफ्टी एफएमसीजी में 0.84 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।


इस बीच, निफ्टी आईटी इंडेक्स (0.46 प्रतिशत की गिरावट) को क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। वहीं, निफ्टी ऑयल एंड गैस का प्रदर्शन भी खराब रहा। इससे पहले सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में बिकवाली के कारण घरेलू बाजार दबाव में आ गया था।


सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इस बीच वैश्विक बाजार स्थिर होने के साथ तेल की कीमतों में भी कुछ गिरावट आई। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 7.56 डॉलर गिरकर 87.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 7.54 डॉलर गिरकर 91.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में ऊर्जा ढांचे पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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