नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बाद भारतीय एयरलाइंस फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) हटाने पर विचार कर रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर ऐसा होता है तो आने वाले महीनों में हवाई यात्रियों को किराए में राहत मिल सकती है।एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइंस फ्यूल सरचार्ज वापस लेने की संभावना पर सक्रिय रूप से विचार कर रही हैं। इस संबंध में अंतिम फैसला चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत या तीसरी तिमाही की शुरुआत तक लिया जा सकता है।

यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल के ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ गई हैं।

हालांकि ईंधन की लागत में काफी कमी आई है, लेकिन एयरलाइन कंपनियों के अधिकारी अभी यह आकलन कर रहे हैं कि यह गिरावट कितनी टिकाऊ है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए कंपनियां कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहतीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल एयरलाइंस "वेट एंड वाच" की रणनीति अपना रही हैं। कंपनियां इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि फ्यूल सरचार्ज को पूरी तरह खत्म किया जाए या फिर इसे चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए, ताकि यात्रियों को राहत देने के साथ-साथ मुनाफे पर भी असर न पड़े।

सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की तुलना में घरेलू मार्गों पर फ्यूल सरचार्ज पहले हटाया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ईंधन लागत और परिचालन खर्च अभी भी अपेक्षाकृत अधिक बने हुए हैं।

एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने मार्च में फ्यूल सरचार्ज लागू किया था। उस समय कच्चे तेल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत काफी बढ़ गई थी।

बढ़ी हुई ईंधन लागत की भरपाई करने के लिए कंपनियों ने मूल टिकट किराए में बड़ा बदलाव किए बिना अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाया था।

अब जब ईंधन की कीमतों में कमी आ रही है, तो एयरलाइंस ने इस अतिरिक्त शुल्क को वापस लेने के समय और उसके दायरे पर आंतरिक चर्चा शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विमानन उद्योग में फ्यूल सरचार्ज को धीरे-धीरे हटाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि हवाई यात्रा अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बन सके, वहीं एयरलाइंस की लाभप्रदता भी बनी रहे।