नई दिल्ली। कनाडा में प्रस्तावित तथाकथित 'खालिस्तान जनमत संग्रह' (खालिस्तान रेफेरेंडम) से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दोहराया कि भारत सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करता है।नई दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस वार्ता के दौरान मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी कार्यक्रम से जुड़े प्रश्न के जवाब में कहा, ''हम सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हैं।''
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया है कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) 18 अक्टूबर को कनाडा के अल्बर्टा में तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना बना रहा है।
अगस्त में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आतंकवादी और एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा खालिस्तान आर्मी और सिख होमलैंड सिक्योरिटी बल बनाने की घोषणा का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि कनाडा की धरती पर सिख युवकों को अर्ध-स्वचालित राइफलों के साथ प्रशिक्षण लेते हुए दिखाने वाले वीडियो बेहद चिंताजनक हैं और इनके सिख समुदाय पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
'खालसा वॉक्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पन्नू ने एक वीडियो जारी कर प्रवासी सिखों से अमेरिका के इंडियाना राज्य की राजधानी इंडियानापोलिस में आयोजित तथाकथित खालिस्तान 'जनमत संग्रह' में भाग लेने की अपील की थी। साथ ही उन्होंने 'सिख होमलैंड सिक्योरिटी' बल या खालिस्तान आर्मी बनाने का विचार भी सामने रखा।
रिपोर्ट में कहा गया, ''ये केवल राजनीतिक बहसें नहीं हैं, बल्कि सोच-समझकर किए गए ऐसे उकसावे हैं, जिनका लक्ष्य वे युवा हैं, जो प्रवास, पहचान और आसान पैसे के दबावों से जूझ रहे हैं। इसका परिणाम यह दिख रहा है कि अमेरिका और कनाडा में सिख युवाओं का एक छोटा वर्ग नशे, अवैध हथियारों और गैंग संस्कृति की ओर बढ़ रहा है, जिससे उनके अपने समुदाय और मेजबान शहर प्रभावित हो रहे हैं।''
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पन्नू के संदेश हर परेशान युवक को नहीं बनाते, लेकिन वे एक ऐसा तैयार नैरेटिव उपलब्ध कराते हैं जो विरोध को महिमामंडित करता है और हर असफलता का दोष भारत पर डालता है। रिपोर्ट के अनुसार, जब पहले से ही सड़क संस्कृति से प्रभावित कोई युवा यह सुनता है कि असली लड़ाई भारतीय राज्य के खिलाफ है और समुदाय को हथियारबंद या सुरक्षित करना उचित है, तो ऑनलाइन बयानबाजी से वास्तविक हथियारों तक पहुंचने की दूरी कम हो जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई खुफिया एजेंसियां पहले भी खालिस्तानी चरमपंथियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बता चुकी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भड़काऊ वीडियो के बाद शक्ति प्रदर्शन का पैटर्न कोई संयोग नहीं है।














