नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान शुक्रवार को उद्योग जगत के नेताओं और वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, नवाचार क्षमता और वैश्विक सहयोग में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की मजबूत विकास दर, उद्यमिता संस्कृति, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश केंद्रित नीतियां ब्रिक्स देशों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।फिक्की (एफआईसीसीआई) की महानिदेशक ज्योति विज ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि ब्रिक्स अब 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों का एक बड़ा और प्रभावशाली समूह बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह समूह वैश्विक उत्पादन, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग से रोजगार सृजन, नवाचार और नए कारोबारी अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम में नेताओं की चर्चाओं से यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि सभी देश साझा विकास और सामूहिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
द कॉर्पोरेट प्रोफाइल्स इंडिया के संस्थापक और अध्यक्ष नीरज भटनागर ने आईएएनएस से कहा कि भारत की ताकत केवल 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर नहीं है, बल्कि देश के लोगों की उद्यमशीलता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय अपने दम पर आगे बढ़ने और कारोबार खड़ा करने की सोच रखते हैं।
उन्होंने कहा, "नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत के पास ऐसी क्षमता है, जो ब्रिक्स देशों और दुनिया के अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।"
वहीं, यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक उपासना अरोरा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है और इसका श्रेय सरकार की प्रभावी नीतियों को जाता है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और वैश्विक आर्थिक साझेदारियां भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेंगी।
उपासना अरोरा ने आगे कहा कि ब्रिक्स मंच पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदगी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत उन ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है, जिसकी लंबे समय से कल्पना की जा रही थी, और देश वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस बीच, जेके पेपर लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तथा इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयर हर्षपति सिंघानिया ने आईएएनएस से कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे डि-डॉलराइजेशन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और रूस जैसे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। उन्होंने बताया कि डॉलर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका बनाए रखेगा, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ सकता है।
वहीं, आईएएनएस से बात करते हुए बरिस्ता कॉफी के सीईओ रजत अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कारोबारी समुदाय को विकास प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से शामिल करना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने, रोजगार सृजन बढ़ाने और विभिन्न देशों के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत करने में सरकार की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रजत अग्रवाल ने आगे कहा कि पिछले पांच से छह वर्षों में भारत ने एक मजबूत और एकीकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित की है। आज देश के अंतिम छोर तक डिजिटल भुगतान का व्यापक प्रसार हो चुका है। उन्होंने बताया कि यदि यूपीआई और भारतीय डिजिटल पेमेंट मॉडल को वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया जाता है, तो यह भारत की वित्तीय कूटनीति और आर्थिक प्रभाव को और मजबूत करेगा।
इसके अलावा, फ्रांस की भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्था बीआरजीएम में अंतरराष्ट्रीय भू-क्षेत्रों के निदेशक ओलिवियर फ्रेजो ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की सराहना की और कहा कि ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक विकास के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स, टंगस्टन और कॉपर जैसे खनिज आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। विशेष रूप से कॉपर नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
फ्रेजो ने आगे कहा कि भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, संसाधन, भूवैज्ञानिक डेटा और खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि बीआरजीएम और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के बीच अन्वेषण, डेटा साइंस और खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी चल रही है।
ओलिवियर फ्रेजो ने आईएएनएस से कहा कि भारत का विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाना एक दूरदर्शी रणनीति है, क्योंकि इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी और खनिज आपूर्ति शृंखला अधिक सुरक्षित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं हैं और दीर्घकालिक एवं विश्वसनीय विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि केवल रीसाइक्लिंग से भविष्य की मांग पूरी नहीं हो सकेगी, क्योंकि क्रिटिकल मिनरल्स की मांग लगातार बढ़ने वाली है। इसलिए नए स्रोतों की खोज और टिकाऊ उत्पादन व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होगा।




