चेन्नई। पिछले छह महीनों में चेन्नई में 'आविन' दूध की बिक्री में काफी कमी आई है, जिसकी मुख्य वजह इसके लोकप्रिय हरे पैकेट की भारी कमी है। इससे ग्राहकों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में परेशानी हो रही है।तमिलनाडु सरकार की डेयरी कोऑपरेटिव पूरे राज्य में दूध की एक बड़ी सप्लायर है और चेन्नई में इसके ग्राहकों की संख्या काफी ज्यादा है। 'आविन' दूध को उसमें मौजूद फैट और बनावट के आधार पर नारंगी, हरे और नीले पैकेट में बेचती है। इनमें से हरे पैकेट को घरों में सबसे अधिक पसंद किया जाता है। कुछ समय पहले तक, चेन्नई में 'आविन' के दूध की रोजाना बिक्री लगभग 16.5 लाख लीटर थी।
हालांकि, दूध के एजेंटों का कहना है कि पिछले छह महीनों में बिक्री 10 से 15 प्रतिशत तक गिर गई है क्योंकि सप्लाई मांग के हिसाब से नहीं हो पा रही है। अगस्त के बाद से यह कमी और भी गंभीर हो गई है।
ग्राहकों का कहना है कि 'आविन' आउटलेट्स और आसपास की दुकानों पर अक्सर हरे रंग के पैकेट वाले दूध नहीं मिल रहे हैं। एजेंटों ने इस समस्या के लिए कोऑपरेटिव द्वारा दूध की अपर्याप्त खरीद को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्राहकों की लगातार मांग के बावजूद दूध की खरीद की मात्रा नहीं बढ़ाई गई है।
सप्लाई में यह दिक्कत सिर्फ चेन्नई तक ही सीमित नहीं है। कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, सलेम और इरोड जिलों में भी ऐसी ही कमी की खबरें आई हैं। कई 'आविन' आउटलेट्स पर सप्लाई किए जाने वाले दूध के क्रेट्स की संख्या भी कम कर दी गई है, जिससे रिटेल में दूध की उपलब्धता पर और असर पड़ा है। चेन्नई के कई इलाकों में 'आविन' दूध के पैकेट सुबह-सुबह ही बिक जाते हैं। जो ग्राहक देर से आते हैं, उन्हें कई आउटलेट्स पर जाना पड़ता है या फिर प्राइवेट डेयरी ब्रांड्स पर निर्भर रहना पड़ता है, जो आम तौर पर अधिक महंगे होते हैं। इस कमी की वजह से कुछ छोटी किराने की दुकानों पर अधिक दाम वसूलने के आरोप भी लगे हैं।
ग्राहकों का कहना है कि हरे 'आविन' दूध के पैकेट की सरकारी कीमत आधे लीटर के लिए 22 रुपये है, वे 24 रुपये में बेचे जा रहे हैं और रिटेलर्स हर पैकेट पर 2 रुपये ज़्यादा ले रहे हैं। जो परिवार नियमित रूप से 'आविन' दूध पर निर्भर हैं, उनका कहना है कि इस कमी से उनके घर का मासिक खर्च बढ़ गया है क्योंकि उनके पास ज्यादा कीमत वाला प्राइवेट दूध खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं है।
ग्राहकों ने राज्य सरकार और 'आविन' मैनेजमेंट से मांग की है कि वे दूध की खरीद और सप्लाई को बेहतर बनाएं, सप्लाई को पहले के स्तर पर लाएं और यह पक्का करें कि दूध के पैकेट तय कीमत पर ही बेचे जाएं। उन्होंने ज़्यादा दाम वसूलने और बनावटी कमी पैदा करने से रोकने के लिए रिटेल आउटलेट्स की नियमित जांच की भी मांग की है। दूध एजेंटों ने चेतावनी दी है कि अगर चेन्नई और दूसरे प्रभावित जिलों में दूध की खरीद और वितरण को तुरंत बेहतर नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।




