इंदौर। भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल और उनके अधिवक्ता विनय जोशी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई 2026 के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए शुक्रवार की नमाज के लिए परिसर के बाहर वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई हुई, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र माना था और वही व्यवस्था फिलहाल प्रभावी बनी हुई है। पिछले लगभग दो महीनों से सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना लगातार चल रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह व्यवस्था पूर्ववत जारी रहेगी। अदालत ने मुस्लिम समाज के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की है, जिसके तहत प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक भोजशाला परिसर के बाहर खुली भूमि पर नमाज की व्यवस्था शासन-प्रशासन द्वारा की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को निर्देश दिया है कि अंतिम निर्णय आने तक परिसर में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। अदालत ने केंद्र सरकार, एएसआई सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और तीन सप्ताह बाद मामले की दोबारा सुनवाई होगी। उनके अनुसार संभावना है कि अगली सुनवाई में नियमित और अंतिम बहस की दिशा तय हो सकती है। मुस्लिम पक्ष ने अपनी याचिका में एएसआई द्वारा 98 दिनों तक कराए गए सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में वही तर्क दोहराए गए हैं, जो पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष रखे गए थे और उसमें कोई नया तथ्य सामने नहीं रखा गया है।

वहीं, हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला को केवल मां सरस्वती का मंदिर माना था और परिसर में नमाज पर रोक लगा दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और नमाज के लिए भोजशाला परिसर के निकट स्थित खाली भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

विनय जोशी ने कहा कि अदालत ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और मामले से जुड़े अन्य सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी उपस्थित रहे, जबकि विभिन्न पक्षों की ओर से कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर किसी भी प्रकार की स्टे नहीं दी है। इसलिए फिलहाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा। अब तीन सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।