भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में भारी से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। इस सीजन में अब तक पूरे प्रदेश में कुल 8 इंच (200.5 मिमी) बारिश हो चुकी है, जो सामान्य वर्षा की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, इस बारिश का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और शहरी बुनियादी ढांचे पर पड़ा है, जहां रतलाम में अंडरब्रिज डूब गए हैं तो सेंधवा में नदी का पानी पुल के ऊपर तक पहुंच गया है।
अगले चार दिन भारी से अति भारी बारिश का ऑरेंज और यलो अलर्ट
मौसम केंद्र (IMD) भोपाल ने आगामी एक-दो दिनों के लिए प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। बुधवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सागर और टीकमगढ़ जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर, इंदौर, धार, जबलपुर और उज्जैन समेत 22 जिलों में भारी बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया गया है, जबकि भोपाल और छिंदवाड़ा सहित 25 जिलों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
धार में सबसे ज्यादा 2.4 इंच बारिश, जुलाई महीने से बड़ी उम्मीदें
बीते 24 घंटों में प्रदेश के भीतर सबसे अधिक 2.4 इंच बारिश धार जिले में रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा राजगढ़ और रतलाम में 2.2 इंच, शिवपुरी व खजुराहो में 2 इंच, तथा उज्जैन व भोपाल में 1.4 इंच बारिश दर्ज हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जून के सूखे के बाद जुलाई महीना राहत लेकर आया है। प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले जुलाई महीने में ही गिरता है। उदाहरण के तौर पर भोपाल में होने वाली सालाना 39 इंच बारिश में से 14 इंच जुलाई में होती है, जबकि जबलपुर में इस महीने रिकॉर्ड 17 इंच से ज्यादा बारिश का ट्रेंड रहता है।
उफनते नालों के बीच जान जोखिम में डाल रहे स्कूली बच्चे और शिक्षक
बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों के मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दांव पर लग गई है। बैतूल के आमला स्थित डेहरी खुर्द गांव में रपटा (पुलिया) न होने के कारण बच्चे हर दिन उफनते नाले को पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन को सात दिन में काम शुरू न होने पर स्कूल बंदी और आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है। उधर, शाजापुर के नौलाया में शासकीय हाई स्कूल के प्राचार्य गोकुल प्रसाद कुलमिया समेत पूरे स्टाफ को शासन की ई-अटेंडेंस प्रणाली के डर से जान जोखिम में डालकर उफनता नाला तैरकर पार करना पड़ा। रीवा के समान विद्यालय परिसर में भी नालियों का गंदा पानी भरने से कक्षाएं जलमग्न हो गई हैं।
सेंधवा में डेब नदी की बाढ़ से हाईवे बंद, रतलाम के अंडरब्रिज में भरा पानी
सेंधवा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से ओझर गांव के पास बहने वाली डेब नदी में भीषण बाढ़ आ गई है। बाढ़ का पानी 14 फीट ऊंचे पुल को छूने लगा है, जिसके बाद सुरक्षा को देखते हुए ओझर-नागलवाड़ी और एबी रोड मार्ग पर सामान्य आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मौके पर पुलिस बल तैनात है। वहीं रतलाम शहर के सागोद रोड स्थित ईश्वर नगर अंडरब्रिज में पानी भर जाने से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है। रेलवे अधिकारियों द्वारा पानी निकालने के लिए लाई गई मोटर भी एन वक्त पर खराब हो गई, जिससे स्कूली बच्चों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सीधी में घरों में घुसा पानी, सिहोरा में क्षतिग्रस्त पुलिया से किसान परेशान
सीधी जिले के वार्ड क्रमांक-22 में नगर पालिका की लापरवाही के कारण नालियां चोक हो गईं, जिससे गणेश वर्णबाल और कैलाश सोनी समेत कई परिवारों के घरों में गंदा पानी घुस गया और उनका घरेलू सामान बर्बाद हो गया। दूसरी तरफ, सिहोरा नगर पालिका के पहरेवा वार्ड में हाईवे से जुनवानी गांव को जोड़ने वाली मुख्य पुलिया लंबे समय से टूटी पड़ी है। इस पुलिया की खराब स्थिति और खतरनाक चढ़ाई के कारण सिमरिया, बरगवां और आलासूर के किसानों को अनाज से लदे ट्रैक्टर निकालने में भारी परेशानी हो रही है, जिससे हर समय बड़े हादसों का खतरा बना रहता है।


