नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक गुरुवार को शुरू हो गई है। बैठक में सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले जीएसटी सुधारों के अगले चरण पर चर्चा की जा रही है।बैठक में दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और मेघालय के मुख्यमंत्री शामिल हैं। इसके अलावा मणिपुर और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी, राजस्व विभाग के सचिव, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष और सदस्य एवं वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हिस्सा ले रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन जीएसटी सुधारों पर विचार किया जा रहा है, उनमें रिफंड की प्रक्रिया को तेज करना, कंपनियों के लिए पंजीकरण को आसान बनाना और जीएसटी के तहत बड़ी संख्या में अपराधों को आपराधिक प्रावधानों से बाहर कर विश्वास आधारित प्रशासन लागू करना शामिल है।
प्रस्तावों में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। इनमें प्रक्रिया संबंधी सुधार, संरचनात्मक सुधार, कारोबार सुगमता, ई-कॉमर्स और सेवाओं का निर्यात शामिल हैं।
जीएसटी प्रणाली में प्रक्रिया संबंधी सुधारों के तहत रिफंड को 10 दिनों के भीतर स्वीकार करने का प्रस्ताव है। जरूरी जानकारी सीमा शुल्क और बैंकिंग प्रणालियों से स्वचालित तरीके से प्राप्त करने के बाद जोखिम जांच के आधार पर 90 प्रतिशत रिफंड जारी किया जाएगा। इसका उद्देश्य कारोबार करने में आसानी को और बढ़ावा देना है।
मुकदमेबाजी के मामलों में नोटिस, सुनवाई और आदेशों के लिए एक समान मानक तय करने और एक निर्धारित सीमा से कम के मामलों में नोटिस जारी न करने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में भी सुधार का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किए गए सुधार सही तरीके से दर्ज हों, बदलावों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और संबंधित बदलाव खरीदार के लेजर में स्वतः दर्ज हो जाएं। इसे ‘इनवॉइस मैचिंग’ कहा जाता है, जिसके तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिकॉर्ड दर्ज किए जाने के चरण में ही सत्यापित किया जा सकेगा। इससे बड़ी संख्या में मिसमैच नोटिस जारी करने की जरूरत खत्म होगी।
वहीं, 61 प्रतिशत करदाताओं को पहले से ही बिना अधिकारी की मंजूरी के तीन कार्यदिवस के भीतर जीएसटी पंजीकरण मिल रहा है। बाकी करदाताओं के लिए भी प्रक्रिया को इस तरह सुव्यवस्थित किया जा रहा है कि अनावश्यक सवालों और पंजीकरण खारिज होने से बचा जा सके।
व्यवसाय बंद करने की प्रक्रिया को भी व्यवसाय शुरू करने जितना ही आसान बनाने का प्रस्ताव है। प्रक्रियागत चूक के कारण निलंबित पंजीकरण को, चूक को ठीक किए जाने के बाद, अधिकारी के हस्तक्षेप के बिना स्वतः बहाल करने की व्यवस्था की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य यह है कि जो काम डेटा के आधार पर किया जा सकता है, उसे प्रणाली स्वयं करे। अधिकारियों को केवल उन मामलों तक सीमित रखा जाए, जहां मानवीय विवेक और निर्णय की आवश्यकता हो।













