फ्रांस (अरियाज)। जैन दर्शन के शाश्वत सिद्धांत "अहिंसा परमो धर्मः" को जन-जन तक पहुँचाने तथा विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रसार के उद्देश्य से श्री मतंगेश्वर सेवा समिति, खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के संयोजन में फ्रांस के अरियाज राज्य के वेंतनात नगर में विश्व अहिंसा दिवस, महात्मा गांधी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


यह आयोजन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अमर संदेश "अहिंसा परमो धर्मः" से प्रेरित था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समिति के प्रमुख पंडित सुधीर कृष्ण शर्मा ने कहा कि आज जब विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों और हिंसा की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब स्थायी विश्व शांति का मार्ग जैन दर्शन के अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम एवं सह-अस्तित्व के सिद्धांतों से ही प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मानवता को स्थायी शांति और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना है तो जैन धर्म के आदर्शों को व्यवहार में अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के अर्हम ध्यान योग के सिद्धांतों, ध्यान-साधना, आत्मशुद्धि तथा मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित प्रतिभागियों ने ध्यान एवं योग के माध्यम से आंतरिक शांति, सकारात्मक जीवन शैली तथा मानवीय मूल्यों के महत्व को समझा।


कार्यक्रम का समापन फ्रांस के लावलाने नगर स्थित योगिनी केथी के योग आश्रम में सामूहिक प्रार्थना, ध्यान एवं विश्व शांति के संकल्प के साथ हुआ।


इस अवसर पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अनुयायी, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, आचार्य श्री रजनीश (ओशो) के शिष्य मंडल तथा बड़ी संख्या में अहिंसा, योग एवं आध्यात्मिक चिंतन से जुड़े साधक एवं शांति-प्रेमी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के अंत में इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने विश्व में प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और अहिंसा के मूल्यों को बढ़ावा देने तथा विश्व शांति के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।