टालिन (एस्टोनिया)। श्री मतंगेश्वर सेवा समिति, खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के नेतृत्व में संचालित विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा का उत्तरी यूरोप के देश एस्टोनिया में भव्य प्रवेश हुआ। भारतीय संस्कृति, सनातन जीवन मूल्यों और "वसुधैव कुटुम्बकम्" के संदेश को विश्वभर में पहुँचाने के उद्देश्य से निकली यह यात्रा अब एस्टोनिया में पाँच दिवसीय आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से विश्व शांति का संदेश देगी।


राजधानी टालिन में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान वैदिक परंपरा के अनुसार हवन-पूजन, विश्व शांति यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चार एवं विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में स्थानीय नागरिक भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय संस्कृति, योग और सनातन परंपराओं से परिचित होंगे। एस्टोनिया उन यूरोपीय देशों में शामिल है जहाँ महात्मा गांधी के शांति, अहिंसा और मानवता के विचारों का विशेष सम्मान किया जाता है। राजधानी टालिन में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा भारत और एस्टोनिया के सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक मानी जाती है।


बाल्टिक सागर के तट पर स्थित एस्टोनिया अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। देश का लगभग आधा भाग घने वनों से आच्छादित है तथा यहाँ 2,000 से अधिक द्वीप, हजारों झीलें और विस्तृत प्राकृतिक क्षेत्र इसकी विशेष पहचान हैं। गर्मियों में लगभग 17 घंटे तक रहने वाला दिन इस देश की प्राकृतिक छटा को और आकर्षक बना देता है।


पंडित सुधीर शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व को शांति, प्रेम और क्षमा के संदेश की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र "वसुधैव कुटुम्बकम्" सम्पूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है और इसी उद्देश्य से यह यात्रा विभिन्न देशों में आयोजित की जा रही है।


इस पाँच दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में एस्टोनिया के स्थानीय नागरिकों का विशेष सहयोग मिल रहा है। मार्टिन कारो, डॉ. लीज, मिस अन्ना वेला एवं श्रीमती शिरली आयोजन के समन्वय और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इनके सहयोग से बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक इस यात्रा से जुड़कर वैदिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं।